पूरे देश में 15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा है। खासतौर पर गोरखपुर में इसका अलग ही महत्व है। यहां एक महीने तक खिचड़ी मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने और खाने का खास महत्व है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
Makar Sankranti 2021: मकर संक्रांति पर जरूर खाएं खिचड़ी, जानिए इसका विशेष महत्व
गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारका तिवारी बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि खिचड़ी में चावल, काली दाल, नमक, हल्दी, मटर और सब्जियां खासतौर पर फूलगोभी डालकर खिचड़ी बनाना खास होता है। दरअसल चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और काली दाल को शनि का। वहीं, हरी सब्जियां बुध से संबंध रखती हैं। कहा जाता है कि खिचड़ी की गर्मी व्यक्ति को मंगल और सूर्य से जोड़ती है। इस दिन खिचड़ी खाने से राशि में ग्रहों की स्थिती मजबूत होती है।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनने की परंपरा को शुरूआत बाबा गोरखनाथ ने की थी। मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इस वजह से योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और कमजोर हो रहे थे। दिन-ब-दिन योगियों की बिगड़ती हालत को देख बाबा गोरखनाथ ने इस समस्या का हल निकालते हुए दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी।
यह व्यंजन पौष्टिक होने के साथ-साथ स्वादिष्ट था। इससे शरीर को तुरंत उर्जा भी मिलती थी। नाथ योगियों को यह व्यंजन काफी पसंद आया। बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा। झटपट तैयार होने वाली खिचड़ी से नाथ योगियों की भोजन की परेशानी का समाधान हो गया और इसके साथ ही वे खिलजी के आतंक को दूर करने में भी सफल हुए।
खिलजी से मुक्ति मिलने के कारण गोरखपुर में मकर संक्रांति को विजय दर्शन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन गोरखनाथ मंदिर परिषद में खिचड़ी मेला आरंभ होता है। महीनों तक चलने वाले इस मेले में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और इसे भी प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है।