कुशीनगर के तमकुहीरोड के पिपराघाट के देवनारायण टोला में सोमवार की रात शायद ही किसी को नींद आई हो। जिस गांव में रोज शाम ढलते आसपास बैठ कर लोग आपस में बातें करते थे। बच्चों की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहां मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। दो सगी बहनों की हत्या की खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। घटना के बाद रातभर पुलिस की गाड़ियां गांव में दौड़ती रहीं और लोगों के घरों पर दस्तक देती रहीं। सुबह पुलिस ने आरोपी राम प्रसाद के घर के आसपास के लोगों का बयान दर्ज किया। उसके रिश्तेदारों को भी पुलिस ने सूचना दी, लेकिन दोपहर तक कोई नहीं आया था। पोस्टमार्टम हाउस पर गांव के हंसराज यादव, सगी बहनों के बाबा पुनदेव निषाद आए थे।
गांव में मंगलवार सुबह जब लोग घरों से निकले तो हर चौखट पर सगी बहनों की हत्या की ही चर्चा थी। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और जांच के चलते अधिकांश ग्रामीण खुलकर कुछ भी कहने से बचते रहे। जिन लोगों ने दोनों बहनों को बचपन से देखा था, उनके चेहरों पर अविश्वास साफ झलक रहा था।
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घर जांच करने पहुंची पुलिस और मृतक दोनें बहनों की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव के बुजुर्ग हों या महिलाएं, हर कोई घटना को लेकर स्तब्ध दिखा। गांव वालों का कहना है कि सोमवार दोपहर जो कुछ हुआ, उसकी भनक आसपास के लोगों को भी नहीं लगी। देर शाम पुलिस के पहुंचने और घर से शव निकलने के बाद ही अधिकतर लोगों को जानकारी हुई। रात होते-होते गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। भागे आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश देती रही।
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मृतक दोनों बहनों की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
समझाने से नहीं बदलीं परिस्थितियां, तनाव के बोझ तले दबा था पूरा परिवार
गांव में चर्चा है कि दोनों बहनों के प्रेम संबंधों को लेकर परिवार लंबे समय से सामाजिक और मानसिक दबाव झेल रहा था। ग्रामीण बताते हैं कि दोनों बहनें तीन-बार घर छोड़कर चली गई थीं। हर बार परिजन, रिश्तेदार और गांव के लोग उन्हें समझा-बुझाकर वापस लाए।
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गांव में पसरा सन्नाटा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पंचायतें भी हुईं, मान-मनौव्वल भी हुआ, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिवार पिछले कई महीनों से तनाव में था। पिता अक्सर बेटियों को समझाने का प्रयास करते थे, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। गांव में यह भी चर्चा है कि इसी तनाव ने आखिरकार एक भयावह रूप ले लिया।
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कुशीनगर में ऑनर किलिंग, जांच के लिए पहुंची पुलिस की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूना पड़ा आंगन, जहां गूंजती थी बहनों की हंसी
मंगलवार को जिस घर के बाहर पुलिस पहरा दे रही थी, वहां कुछ दिन पहले तक दो बेटियों की हंसी गूंजती थी। घर का आंगन वीरान था, दरवाजे बंद थे और आसपास खड़े लोग खामोशी से उस घर की ओर देख रहे थे। गांव की महिलाओं की आंखों में घटना को लेकर दर्द साफ दिखाई दे रहा था। एक बुजुर्ग महिला ने कहा, बेटियां चाहे जैसी हों, मां-बाप का दिल आखिर मां-बाप का ही होता है। किसी ने नहीं सोचा था कि बात यहां तक पहुंच जाएगी। गांव के लोग घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सभी की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं।