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Durga Puja 2021: जानिए गोरखपुर में कब हुई दुर्गा पूजा की शुरुआत, किसे जाता है इसका श्रेय

Mon, 11 Oct 2021 01:34 AM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 11 Oct 2021 01:34 AM IST
सार

1953 में बाबू महादेव प्रसाद रईस ने अपने पिता भगवती प्रसाद की स्मृति में समिति को एक भूखंड प्रदान किया, जहां आज दुर्गाबाड़ी है। तभी से यहां समिति की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा।

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Durga Puja 2021 - फोटो : अमर उजाला।

बंगाल के बाद पूरे देश में अगर कहीं सबसे अधिक दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना होती है वह गोरखपुर शहर में होती है। यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत 1896 में हुई जो निरंतर जारी है। यह दुर्गा पूजा शुरू करने का श्रेय बंगाली समिति को जाता है। समिति की ओर से यहां शुरू की गई व्यवस्थित दुर्गा पूजा ने ही आज भव्य रूप ले लिया है।



इतिहास में जाएं तो गोरखपुर में बंगाल के रहने वाले डॉ. योगेश्वर राय, जो जिला अस्पताल में सिविल सर्जन थे, ने 1896 में अस्पताल परिसर में दुर्गा पूजा की शुरुआत की। यहां 1903 तक दुर्गा पूजा होती रही। 1903 में प्लेग महामारी फैली, जिसके कारण दुर्गा पूजा बंद करनी पड़ी। यह 1906 तक बंद रही। 1907 से 1909 तक जुबली कॉलेज के प्रधानाचार्य राय साहब अघोर नाथ चटर्जी व डॉ.राधा विनोद राय ने जुबली कॉलेज में दुर्गा पूजा की शुरुआत की।

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durga puja - फोटो : अमर उजाला।

1910 में आर्य नाट्य मंच का गठन हुआ। इसी समय दुर्गा पूजा अलहदादपुर में स्थानांतरित हो गई। दुर्गा पूजा को गति और व्यवस्थित रूप मिले, इसके लिए 1928 में आर्य नाट्य मंच और सुहृदय समिति का विलय कर बंगाली समिति का गठन हुआ, जिसने दुर्गा पूजा की जिम्मेदारी संभाल ली। इसी समय दुर्गा पूजा स्थानांतरित होकर भगवती प्रसाद रईस के हाता में आ गई। कुछ वर्षों के बाद यह पूजा चरणलाल चौराहे पर आयोजित होने लगी।

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durga puja - फोटो : अमर उजाला।

1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय सरकार ने चरणलाल चौराहा स्थित वह भवन अधिग्रहीत कर लिया तो समिति ने दुर्गा पूजा को दीवान बाजार में स्थानांतरित कर दिया। 1953 में बाबू महादेव प्रसाद रईस ने अपने पिता भगवती प्रसाद की स्मृति में समिति को एक भूखंड प्रदान किया जहां आज दुर्गाबाड़ी है। तभी से यहां समिति की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा। इसके बाद शहर में अनेक जगहों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए जाने का सिलसिला शुरू हो गया, जिसके बाद से वर्तमान में शहर में हजारों की संख्या में दुर्गा प्रतिमा स्थापित होती हैं।

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durga puja - फोटो : अमर उजाला।

1971 में हुई कालीबाड़ी की दुर्गा पूजा की शुरुआत
कालीबाड़ी दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष चंदन अग्रवाल ने बताया कि शहर के रेती चौक स्थित कालीबाड़ी दुर्गा उत्सव की शुरुआत वर्ष 1971 में विश्वनाथ विश्वास, बीएन कुंडू, स्वतंत्र रस्तोगी और कृष्ण चंद्र गुप्ता ने की थी। पहली बार जो मूर्ति स्थापित की गई, उसे समिति के सदस्यों ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था। उस समय माता का रौद्र रूप दर्शनीय था। बाद की पीढ़ी ने मूर्ति को कलात्मक कर इसे सौम्य स्वरूप प्रदान किया।

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durga puja - फोटो : अमर उजाला।

1970 में पड़ी दीवान बाजार दुर्गा पूजा की नींव
दीवान बाजार दुर्गा पूजा समिति के व्यवस्थापक जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं को देवी दर्शन के लिए दूर न जाना पड़े, इसलिए शहर के पुराने मुहल्ले दीवान बाजार में दुर्गा पूजा उत्सव का आयोजन हुआ। 1970 में मुहल्ले के देवेंद्र नाथ अग्रवाल, मुन्नी लाल जैन, अनिल खरे, बुद्धिलाल शर्मा, देवेंद्र नाथ चटर्जी, सुदामा शर्मा, नवल मौर्या, सुरेश अग्रवाल व माधव प्रसाद अग्रवाल ने मिलकर दुर्गा पूजा शुरू की जो आज तक अनवरत रूप से जारी है। यहां पूजा शुरू से ही बंगाली रीति-रिवाज से होती है।

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