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बाबा गोरखनाथ धाम में खिचड़ी मेले के रंग, पहले दिन की झलकियां तस्वीरों के संग
Wed, 15 Jan 2020 06:14 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 15 Jan 2020 06:14 PM IST
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गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी मेला का धूम।
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के मुख्य परिसर में जहां आस्था और श्रद्धा भारी रही, वही परिसर लगे मैदान में मेले का माहौल अलग रहा। बेफ्रिक और पूरी मस्ती का मूड। चंद घंटों के लिए सब कुछ भुला देने वाला। तरह-तरह के झूले, स्टूडियो, निशानेबाजी के स्टाल, खाने-पीने और चाट-पकौड़ी की दुकानें।
नेपाल का बानिया परिवार
- फोटो : amarujala
मकर संक्रांति के पर्व पर नेपाल के भुटवल निवासी बानिया परिवार पिछले 35 सालों से लगातार बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आता है। परिवार के साथ बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के बाद मीना बानिया ने बताया कि बाबा गोरखनाथ के आर्शीवाद से ही बेटे रोहित और बेटी रश्मि बानिया ने अपनी पढ़ाई पूरी कर आज अपने पैरों पर खड़े हैं।
बाबा गोरखनाथ के दर्शन मात्र से पूरे परिवार के कष्ट दूर हो जाते हैं। वो अपने दर पर आने वाले श्रद्धालु की झोली कभी खाली नहीं छोड़ते हैं। यही वजह है कि हर साल सपरिवार बाबा गोरखनाथ का दर्शन करने हम लोग गोरखनाथ मंदिर में आते हैं। पति रामविलास ने बताया कि भुटवल से मंगलवार की रात ही गोरखपुर आ गए थे। सुबह नौ बजे बाबा गोरखनाथ का खिचड़ी चढ़ाई है, अब सपरिवार नेपाल के लिए रवाना होंगे।
बाबा गोरखनाथ के दर्शन मात्र से पूरे परिवार के कष्ट दूर हो जाते हैं। वो अपने दर पर आने वाले श्रद्धालु की झोली कभी खाली नहीं छोड़ते हैं। यही वजह है कि हर साल सपरिवार बाबा गोरखनाथ का दर्शन करने हम लोग गोरखनाथ मंदिर में आते हैं। पति रामविलास ने बताया कि भुटवल से मंगलवार की रात ही गोरखपुर आ गए थे। सुबह नौ बजे बाबा गोरखनाथ का खिचड़ी चढ़ाई है, अब सपरिवार नेपाल के लिए रवाना होंगे।
गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय के अस्थाई अस्पताल में भर्ती युवक।
- फोटो : amarujala
खिचड़ी चढ़ाने आये सिद्धार्थनगर के भुसौला राही निवासी अतुल मिश्रा चक्कर खा कर गिर पड़े। उन्हें मंदिर परिसर में बने गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय के अस्थाई अस्पताल में भर्ती कराया गया
266 लोगों का अस्थायी अस्पताल में हुआ इलाज
गोरखपुर। खिचड़ी मेला के अंतर्गत मेला परिसर में बने अस्थायी अस्पताल के अंतर्गत बुधवार को 266 लोगों को उपचार मिला। इस दौरान जो थोड़ा गंभीर थे उन्हें गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय के अस्थायी अस्पताल में भर्ती किया गया। बाद में आराम होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। उपचार के आने वाले ज्यादातार मरीजों ने पेट दर्द, बुखार, सिर दर्द, उल्टी, चक्कर और बदन दर्द का इलाज कराया। डॉ. जेके मिश्रा और डॉ. मनोज अग्रहरि ने बताया कि एलोपैथी के 151 मरीजों की जांच कर दवाएं प्रदान की गई है। वहीं, आयुर्वेदिक इकाई की ओर से 115 मरीजों को इलाज दिया गया है।
266 लोगों का अस्थायी अस्पताल में हुआ इलाज
गोरखपुर। खिचड़ी मेला के अंतर्गत मेला परिसर में बने अस्थायी अस्पताल के अंतर्गत बुधवार को 266 लोगों को उपचार मिला। इस दौरान जो थोड़ा गंभीर थे उन्हें गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय के अस्थायी अस्पताल में भर्ती किया गया। बाद में आराम होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। उपचार के आने वाले ज्यादातार मरीजों ने पेट दर्द, बुखार, सिर दर्द, उल्टी, चक्कर और बदन दर्द का इलाज कराया। डॉ. जेके मिश्रा और डॉ. मनोज अग्रहरि ने बताया कि एलोपैथी के 151 मरीजों की जांच कर दवाएं प्रदान की गई है। वहीं, आयुर्वेदिक इकाई की ओर से 115 मरीजों को इलाज दिया गया है।
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हिन्दू युवा वाहिनी की टीम जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह
- फोटो : amarujala
गोरखनाथ मंदिर में दर्शन करने आने वाले लाखों की तादात में श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए हिन्दू युवा वाहिनी की टीम जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह की अगुवाई में जुटी है।
इन सबके लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। आप 5 के हों या 55 वर्ष या इससे भी ऊपर के। पास में पैसा है तो कोई फर्क नहीं पड़ता। आराम से निशानेबाजी का शौक पूरा करें, मनमाफिक झूले का आनंद लें। मन करे तो मौत के कुएं में कलाकार का रोंगटे खड़ा करने वाला हैरतअंगेज कारनामा देखें या जादू का इंद्रजाल।
मेले में चाइनीज से लेकर पिज्जा, बर्गर, पावभाजी, डोसा, भेलपूरी, छोले-भटूरे और पापकार्न की दुकानें भी सजी हैं। मर्जी और स्वाद के अनुसार इनका भी आनंद लें। मेले की पहचान बन चुकी खजला की दुकानें तो मेला परिसर से लेकर, मंदिर की ओर आने वाली हर सड़क पर दिखीं।
इन सबके लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। आप 5 के हों या 55 वर्ष या इससे भी ऊपर के। पास में पैसा है तो कोई फर्क नहीं पड़ता। आराम से निशानेबाजी का शौक पूरा करें, मनमाफिक झूले का आनंद लें। मन करे तो मौत के कुएं में कलाकार का रोंगटे खड़ा करने वाला हैरतअंगेज कारनामा देखें या जादू का इंद्रजाल।
मेले में चाइनीज से लेकर पिज्जा, बर्गर, पावभाजी, डोसा, भेलपूरी, छोले-भटूरे और पापकार्न की दुकानें भी सजी हैं। मर्जी और स्वाद के अनुसार इनका भी आनंद लें। मेले की पहचान बन चुकी खजला की दुकानें तो मेला परिसर से लेकर, मंदिर की ओर आने वाली हर सड़क पर दिखीं।
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गोरखनाथ मंदिर के बाहर लगीं लोगों की लंबी कतारें।
- फोटो : amarujala
गोरखनाथ मंदिर के बाहर लगीं लोगों की लंबी कतारें।
इस माहौल में बड़ों के साथ चल रहे बच्चों का मचलना आम बात है। फिर तो उनको मनाने के लिए उनकी पसंद के अनुसार बाइक, कार, हाथी, घोड़े और जिराफ की शक्ल में बने झूलों पर बैठाना मजबूरी थी। इनके लिए बाइक से लेकर कार और जीप पर फर्राटा भरने का भी इंतजाम भी था। ऐसे में लोग भी खुश थे और बच्चे भी।
वहां जादू का इंद्रजाल था तो मौत के कुएं का रोमांच भी। इन सारे लमहों को यादगार बनाने के लिए लोग स्टूडियो में पसंद की ड्रेस और परिवेश (पहाड़, झरना और रेगिस्तान आदि) में फोटो भी खिंचवा रहे थे।
इस माहौल में बड़ों के साथ चल रहे बच्चों का मचलना आम बात है। फिर तो उनको मनाने के लिए उनकी पसंद के अनुसार बाइक, कार, हाथी, घोड़े और जिराफ की शक्ल में बने झूलों पर बैठाना मजबूरी थी। इनके लिए बाइक से लेकर कार और जीप पर फर्राटा भरने का भी इंतजाम भी था। ऐसे में लोग भी खुश थे और बच्चे भी।
वहां जादू का इंद्रजाल था तो मौत के कुएं का रोमांच भी। इन सारे लमहों को यादगार बनाने के लिए लोग स्टूडियो में पसंद की ड्रेस और परिवेश (पहाड़, झरना और रेगिस्तान आदि) में फोटो भी खिंचवा रहे थे।