जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के वायरस अब रूप बदल रहे हैं। मरीजों में ऐसे लक्षण नहीं मिल रहे हैं, जो इस बात के संकेत दे सकें कि उनमें जेई के लक्षण थे। इस बात से विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकेत ठीक नहीं हैं। इसकी वजह वायरस का म्युटेशन हो सकता है। इस पर अब शोध की जरूरत है।
Japanese encephalitis: जेई के वायरस ने बदला रूप, नहीं मिल रहे मरीजों में लक्षण
जानकारी के मुताबिक, जिले में इस साल जेई और एक्यूट इंसेफेलाइटिस के सिंड्रोम (एईएस) के कुल 27 मरीज मिल चुके हैं। इनमें पांच जापानी इंसेफेलाइटिस के हैं। इन पांच मरीजों में पहली बार जेई के कोई भी लक्षण नहीं मिले हैं। वेक्टर बोर्न डिजीज के प्रभारी एसीएमओ डॉ एके चौधरी ने बताया कि जेई के नए लक्षणों ने परेशानी बढ़ा दी है।
इस बार जो भी जेई के मरीज मिले हैं, उन्हें झटका आने की शिकायत रही। ऐसी स्थिति में परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल और बीआरडी लेकर पहुंचे हैं, जहां उस इलाके की स्थिति को देखते हुए जेई की जांच की गई, तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। इस पर उनका इलाज शुरू किया गया, जिनमें चार मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं जबकि एक मरीज का इलाज बीआरडी में चल रहा है।
सीढ़ी से गिरा, जांच में निकला जापानी इंसेफेलाइटिस
खोराबार के जंगल चौरी का रहने वाला 12 साल का बच्चा सीढ़ी से गिरा गया। इस बीच उसे झटके आने लगे। परिजन सीएचसी के लिए ले गए, जहां से डॉक्टरों ने बीआरडी रेफर कर दिया। बीआरडी में इलाज के दौरान एहतियात के तौर पर उसकी जेई जांच की गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके अलावा मझघाट के रहने वाले पांच वर्ष के बच्चे को अचानक झटका आना शुरू हुआ। जांच में जेई की पुष्टि हुई। इसी तरह कुसम्ही के 10 साल के बालक और फुलवरिया की एक साल की मासूम को भी जेई के कोई लक्षण नहीं थे, झटका आने पर लोगों को भर्ती कराया गया था।
पिछले साल हाई ग्रेड फीवर के आए थे 1,228 मामले
पिछले हाई ग्रेड फीवर (तेज बुखार) के 1,228 मामले आए थे। इनमें 251 एईएस और 14 मरीज जेई के मिले थे। जबकि, एईएस के 15 मरीजों की मौत भी हुई थी। इसके बाद दस्तक अभियान में हाईग्रेड फीवर वाले मरीजों की जेई और एईएएस की जांच कराई जा रही है।
60 फीसदी स्क्रब टाइफस और 15 फीसदी लेप्टोस्पायरोसिस बन रहे कारण
जेई और एईएस के जो भी मरीज पूर्वांचल में मिल रहे हैं, उनमें 60 फीसदी कारण स्क्रब टाइफस हैं, जिसके वाहक चूहा व छछूंदर हैं। इसके अलावा 15 फीसदी कारण लेप्टोस्पायरोसिस के हैं, जिनके कारण कुत्ते, बिल्ली से पनपने वाले बैक्टीरिया हैं।
| वर्ष | एईएस रोगी | मृत्यु | जेई रोगी | मृत्यु |
| 2016 | 701 | 139 | 36 | 9 |
| 2017 | 874 | 121 | 49 | 10 |
| 2018 | 458 | 38 | 39 | 3 |
| 2019 | 316 | 15 | 33 | 4 |
| 2020 | 235 | 14 | 14 | 2 |
| 2021 | 251 | 15 | 14 | 0 |
| 2022 | 27 | 0 | 5 | 0 |
लक्षण न मिलना चिंताजनक
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि जेई और एईएस के मरीजों में सबसे सामान्य लक्षण हाइग्रेड फीवर था। अगर यह लक्षण नहीं मिल रहे हैं, तो चिंता का विषय है। इस पर शोध की जरूरत है। बताया कि जांच के लिए सैंपल आ रहे हैं। इस पर शोध किया जाएगा। इससे सही जानकारी मिल सकेगी कि वायरस की संरचना में बदलाव तो नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो यह चिंताजनक है।