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विशेषज्ञों की सलाह: ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए असरदार है इट्राकोनाजोल, बीआरडी में 200 से अधिक मरीजों को दी जा चुकी है ये दवा
Sun, 25 Jul 2021 10:09 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 25 Jul 2021 10:09 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए इट्राकोनाजोल असरदार है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के 200 से अधिक मरीजों को यह दवा दी जा चुकी है। मरीजों के शरीर पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं देखने को मिला है। केजीएमयू में इस दवा का ट्रायल शुरू हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक समेत व्हाइट फंगस के मरीजों के लिए यह दवा ज्यादा कारगर है। फंगस के मरीजों को लगातार यह दवा दी जा रही है।
BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पोस्ट कोविड वार्ड के नोडल प्रभारी व नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि एम्फोटेरिसिन-बी की अपेक्षा इट्राकोनाजोल दवा ज्यादा सस्ती और असरदार है। इस दवा का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं है, जबकि एम्फोटेरिसिन-बी का शरीर के कई अंगों पर दुष्प्रभाव है। यह किडनी पर ज्यादा असर करती है। ज्यादा गंभीर मरीजों के फंगस वाले स्थान इस इंजेक्शन को लगाया जाता है, इसके बाद इट्राकोनाजोलदवा दी जाती है।
ब्लैक फंगस का ऑपरेशन करते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला।
10 मरीजों के जबड़ों तक पहुंचा फंगस का असर
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि 10 मरीजों के जबड़ों तक फंगस का असर पहुंच गया था। इनके जबड़ों से फंगस वाले हिस्से को काटकर अलग कर दिया गया है। इन मरीजों को भी इट्राकोनाजोल दवा दी जा रही है। ऐसे मरीजों को सलाह दी गई है कि तीन माह तक रुटीन जांच कराते रहे।
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि 10 मरीजों के जबड़ों तक फंगस का असर पहुंच गया था। इनके जबड़ों से फंगस वाले हिस्से को काटकर अलग कर दिया गया है। इन मरीजों को भी इट्राकोनाजोल दवा दी जा रही है। ऐसे मरीजों को सलाह दी गई है कि तीन माह तक रुटीन जांच कराते रहे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
सात से अधिक मरीजों की हो चुकी है मौत
जिले में अबतक सात से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। सभी मौतें लखनऊ के केजीएमयू और निजी अस्पताल में हुई हैं। यह सभी मरीज शहर के निजी अस्पतालों से रेफर किए गए थे। इनके मस्तिष्क और आंखों में फंगस का असर ऐसा रहा है कि इनकी आंखें तक निकालनी पड़ी थी। लेकिन इसके बाद भी इन्हें बचाया नहीं जा सका है।
जिले में अबतक सात से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। सभी मौतें लखनऊ के केजीएमयू और निजी अस्पताल में हुई हैं। यह सभी मरीज शहर के निजी अस्पतालों से रेफर किए गए थे। इनके मस्तिष्क और आंखों में फंगस का असर ऐसा रहा है कि इनकी आंखें तक निकालनी पड़ी थी। लेकिन इसके बाद भी इन्हें बचाया नहीं जा सका है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
केजीएमयू में हुआ ट्रायल शुरू
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में इट्राकोनाजोल दवा का ट्रायल शुरू किया गया है। जबकि बीआरडी में 200 से अधिक मरीजों पर इसका प्रभाव देखा जा चुका है। इसके नतीजे भी बेहतर मिले हैं। डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि ट्रायल होने से पहले यह दवा मरीजों को दी जा चुकी है। यह कारगर और बेहद असरदार है। लेकिन इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टरों की सलाह पर ही मरीज करें।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में इट्राकोनाजोल दवा का ट्रायल शुरू किया गया है। जबकि बीआरडी में 200 से अधिक मरीजों पर इसका प्रभाव देखा जा चुका है। इसके नतीजे भी बेहतर मिले हैं। डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि ट्रायल होने से पहले यह दवा मरीजों को दी जा चुकी है। यह कारगर और बेहद असरदार है। लेकिन इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टरों की सलाह पर ही मरीज करें।