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सोना कितना सोना है: सहालग में भी धंधेबाजों की 'दीपावली' कर रहे दोहरी कमाई- GST चोरी और खपा रहे अवैध बुलियन
Tue, 12 Nov 2024 10:44 AM IST
रोहित सिंह
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Tue, 12 Nov 2024 10:44 AM IST
सार
सोना कितना सोना है: धंधेबाजों ने शहर से लेकर आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों की कई दुकानों में बड़े पैमाने पर अवैध सोना पहुंचा दिया है। इसके अलावा जीएसटी की चोरी भी बड़े पैमाने पर की जा रही है। लगन को देखते हुए धंधेबाज सस्ता सोना बताकर दोहरा मुनाफा बना रहे हैं। जबकि जीएसटी के अधिकारी सालाना 40 लाख रुपये टर्नओवर के जाल में उलझे रह जाते हैं।
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सोना
- फोटो : amarujala.com
सहालग आज से शुरू होने वाला है। ऐसे में सोना-चांदी के धंधेबाजों ने भी बाजार से मोटा मुनाफा कमाने की तैयारी कर ली है। धंधेबाजों ने शहर से लेकर आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों की कई दुकानों में बड़े पैमाने पर अवैध सोना पहुंचा दिया है। इसके अलावा जीएसटी की चोरी भी बड़े पैमाने पर की जा रही है।
पिछले दिनों नेपाल के रूपनदेही जिले की पुलिस ने बरामद किया गया सोना।
धंधेबाज इसे अच्छे से समझते हैं। उन्होंने दोहरे लाभ का रास्ता निकाला है। वे प्रतिमाह अपनी दुकानों से तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की बिक्री दिखा देते हैं। सराफा सूत्रों की मानें तो इस समय चांदी एक लाख रुपये प्रति किलो और सोना 86 लाख रुपये प्रति किलो है।
ऐसे में अगर एक सराफा व्यापारी प्रतिदिन मात्र 20 ग्राम सोने की बिक्री करता है तो ऐसे में लगभग 1,60,000 लाख रुपये से अधिक की बिक्री कर लेगा। ऐसे ही अगर 200 ग्राम चांदी मान लें तो भी ये 20 हजार रुपये (अनुमानित गणना) की हो जाएगी। ऐसे एक दिन की बिक्री लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये हो जाएगी।
ऐसे में अगर एक सराफा व्यापारी प्रतिदिन मात्र 20 ग्राम सोने की बिक्री करता है तो ऐसे में लगभग 1,60,000 लाख रुपये से अधिक की बिक्री कर लेगा। ऐसे ही अगर 200 ग्राम चांदी मान लें तो भी ये 20 हजार रुपये (अनुमानित गणना) की हो जाएगी। ऐसे एक दिन की बिक्री लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये हो जाएगी।
पिछले दिनों पकड़ा गया तीन किलो अवैध सोना
- फोटो : अमर उजाला
इसी अनुपात में अगर 15 दिन दुकान में इतने मात्रा में ही खरीद-बिक्री हुई तो भी 27 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी।
दरअसल, पहले सोने-चांदी का कारोबार विश्वास की कसौटी पर होता था। मगर, जीएसटी बिल की अनिवार्यता अब कानूनी पचड़े से बचने के लिए जरूरी हो गया है। सस्ते में सोना-चांदी बेचने की होड़ में कई धंधेबाज जीएसटी बिल नहीं देते। ये बिना बिल की कच्ची पर्ची पर अपने दुकान से अवैध सोने से आभूषणों की बिक्री कर देते हैं।
सरकार ने सोने-चांदी के ट्रैवेल (दूसरी जगह ले जाने) पर हाल में ही नया नियम भी निकाला है। इसके तहत दुकानदार प्रदेश के अंदर एक से दूसरे दुकान पर दो लाख रुपये से अधिक का सोना बिना कागज के नहीं ले जा सकते हैं। इसके लिए ई-वे बिल बनवाना पड़ेगा। यदि सोना ले जाते वक्त ई-वे बिल नहीं मिला तो जीएसटी विभाग इसे अवैध मानकर जब्त कर लेगा।
दरअसल, पहले सोने-चांदी का कारोबार विश्वास की कसौटी पर होता था। मगर, जीएसटी बिल की अनिवार्यता अब कानूनी पचड़े से बचने के लिए जरूरी हो गया है। सस्ते में सोना-चांदी बेचने की होड़ में कई धंधेबाज जीएसटी बिल नहीं देते। ये बिना बिल की कच्ची पर्ची पर अपने दुकान से अवैध सोने से आभूषणों की बिक्री कर देते हैं।
सरकार ने सोने-चांदी के ट्रैवेल (दूसरी जगह ले जाने) पर हाल में ही नया नियम भी निकाला है। इसके तहत दुकानदार प्रदेश के अंदर एक से दूसरे दुकान पर दो लाख रुपये से अधिक का सोना बिना कागज के नहीं ले जा सकते हैं। इसके लिए ई-वे बिल बनवाना पड़ेगा। यदि सोना ले जाते वक्त ई-वे बिल नहीं मिला तो जीएसटी विभाग इसे अवैध मानकर जब्त कर लेगा।
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जीएसटी
- फोटो : istock
कर अपवंचन (व्यापार के सापेक्ष टैक्स नहीं जमा) मानते हुए उसे सील कर टैक्स निर्धारित कर देगा। अभी तक जीएसटी की टीम सिर्फ पंजीकरण फर्म की लेन-देन के रिकाॅर्डों की ही जांच कर सकती थी। इससे वैध और अवैध सोने को खपाने वाले व्यापारियों की चांदी थी।
खपाते हैं काले धन को भी
शहर से लेकर आस-पास तक धंधेबाजों ने अपनी काली कमाई को खपाने के लिए धंधेबाजों के साथ कड़ी बना ली है। अवैध सोने की खरीद-बिक्री का रिकाॅर्ड शून्य होता है। ऐसे में काली कमाई से इनका भुगतान कर देते हैं। इसके भुगतान से मिलने वाली रकम को जमीनों या बिल्डिंग के साथ रिजॉर्ट के धंधों में खपा देते हैं।
इनकी खरीद और बिक्री में भी खाते के माध्यम से और नकद भुगतान होता है। ऐसे में नकद का भुगतान इसी काली कमाई से अर्जित धन को लगाकर अपने प्रोजेक्ट को तैयार करते हैं। इसके बाद इसका दाम लगाकर ग्राहकों से भी खाते में रकम लेकर काली कमाई को फिर से सफेद कर देते हैं।
खपाते हैं काले धन को भी
शहर से लेकर आस-पास तक धंधेबाजों ने अपनी काली कमाई को खपाने के लिए धंधेबाजों के साथ कड़ी बना ली है। अवैध सोने की खरीद-बिक्री का रिकाॅर्ड शून्य होता है। ऐसे में काली कमाई से इनका भुगतान कर देते हैं। इसके भुगतान से मिलने वाली रकम को जमीनों या बिल्डिंग के साथ रिजॉर्ट के धंधों में खपा देते हैं।
इनकी खरीद और बिक्री में भी खाते के माध्यम से और नकद भुगतान होता है। ऐसे में नकद का भुगतान इसी काली कमाई से अर्जित धन को लगाकर अपने प्रोजेक्ट को तैयार करते हैं। इसके बाद इसका दाम लगाकर ग्राहकों से भी खाते में रकम लेकर काली कमाई को फिर से सफेद कर देते हैं।
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Gold
- फोटो : Istock
कैरियर परिवार को बनाते हैं सहारा
अवैध रूप से सोना-चांदी लाने ले जाने वाले कैरियर, कार में परिवार सहित यात्रा करते हैं, ताकि पुलिस को शक न हो। पुलिस या जीएसटी की मोबाइल दस्ते की टीम भी कई बार परिवार की महिलाओं और बच्चों को देखकर यह समझ जाती है कि पारिवारिक यात्रा है।
ऐसे में उनकी अधिक तलाशी नहीं ली जाती। इस तरह वे चकमा देकर बच जाते हैं। अभी पिछले दिनों आगरा-मथुरा एक्सप्रेस हाईवे पर जीएसटी की टीम ने तकरीबन 11 करोड़ रुपये का अवैध सोना (बिना बिल बाउचर) पकड़ा था।
अवैध रूप से सोना-चांदी लाने ले जाने वाले कैरियर, कार में परिवार सहित यात्रा करते हैं, ताकि पुलिस को शक न हो। पुलिस या जीएसटी की मोबाइल दस्ते की टीम भी कई बार परिवार की महिलाओं और बच्चों को देखकर यह समझ जाती है कि पारिवारिक यात्रा है।
ऐसे में उनकी अधिक तलाशी नहीं ली जाती। इस तरह वे चकमा देकर बच जाते हैं। अभी पिछले दिनों आगरा-मथुरा एक्सप्रेस हाईवे पर जीएसटी की टीम ने तकरीबन 11 करोड़ रुपये का अवैध सोना (बिना बिल बाउचर) पकड़ा था।