गोरखपुर में देखरेख के अभाव में फैली जलकुंभी से रामगढ़ताल की खूबसूरती पर दाग लग रहा है। ये दाग देखने में तो गंदे हैं ही संदेश भी खराब दे रहे। होली के अगले दिन बड़ी संख्या में बोटिंग करने पहुंचे सैकड़ों लोग ताल में फैली जलकुंभी देखकर निराश हुए।
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रामगढ़ताल
- फोटो : अमर उजाला।
वहीं, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) का कहना है कि बार-बार की सफाई के बाद भी जलकुंभी खत्म नहीं हो रही। अब इसे विशेषज्ञ फर्म से सफाई कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए एक सप्ताह के अंदर टेंडर निकाला जाएगा।
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रामगढ़ताल
- फोटो : अमर उजाला।
दरअसल, पहले रामगढ़ताल की सफाई का काम जल निगम के पास था। हाल ही में जिल निगम ने ताल की देखरेख की जिम्मेदारी जीडीए को हैंडओवर कर दी। नया सवेरा और जेट्टी पर सबसे अधिक भीड़ जुटने से जीडीए प्राथमिकता के आधार पर सर्किट हाउस से लेकर जेट्टी तक जलकुंभी की सफाई कराता है।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
मगर पूर्वी एवं उत्तर छोर पर सफाई नहीं होने से जब भी उधर से हवा चलती है तो पूरे ताल में जलकुंभी फैल जाती है। इससे प्राय: बोटिंग प्रभावित हो जाती है। मंगलवार को भी दोपहर तक बोटिंग प्रभावित रही। कुछ ही मोटर बोटों का संचालन हो पाया।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
जीडीए उपाध्यक्ष आशीष कुमार ने कहा कि रामगढ़ताल की सफाई व देखरेख की जिम्मेदारी हाल ही में जल निगम से प्राधिकरण को मिली है। जलकुंभी की सफाई के लिए प्राधिकरण के पास प्रशिक्षित लोग और जरूरी संसाधन नहीं है। यही वजह है कि ऐसी फर्म जो बड़े-बड़े ताल में जलकुंभी सफाई का काम करती है, उससे रामगढ़ताल की सफाई कराने का निर्णय लिया गया है। इसी सप्ताह टेंडर निकाले जाएंगे। टेंडर अल्प समयावधि वाले होंगे ताकि शीघ्र जलकुंभी सफाई का काम शुरू कराया जा सके।