गोरखपुर में आखिरकार नगर निगम प्रशासन ने राप्ती तट स्थित अंत्येष्टि स्थल पर की पर्देदारी को खत्म कर दिया। राप्ती नदी पुल की जाली पर लगाए गए ' अंत्येष्टि स्थल पर वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करना दंडनीय अपराध है' लिखे हुए बैनर को हटा दिया। नगर निगम प्रशासन ने सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद इस पर पर्देदारी को खत्म करने का निर्णय लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
गोरखपुरः अंत्येष्टि स्थल पर लगा था बैनर, 'तस्वीरें लेना दंडनीय अपराध है', विवाद हुआ तो हटाए गए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राप्ती नदी पुल पर से अंत्येष्टि स्थल पर शवों के दाह संस्कार का दृश्य आसानी से दिख जाता है। इन दिनों काफी संख्या में कोरोना संक्रमित शवों का दाह संस्कार होने की वजह से यह दृश्य काफी भयावह भी नज़र आता है। कई लोग अपने मोबाइल से ना सिर्फ फोटो बल्कि वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे थे ।
इसको देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने राप्ती नदी पुल पर के जाली पर ऐसे एक-दो बैनर नहीं, बल्कि कई बैनर लगा दिए थे। बैनर पर लिखा हुआ था कि 'शवदाह गृह पर पार्थिव शरीर का दाह संस्कार हिंदू रीति रिवाज के अनुसार किया जा रहा है। कृपया फोटोग्राफी/ वीडियोग्राफी ना करें। ऐसा करना दंडनीय अपराध है।' नगर निगम प्रशासन के इस कदम का सोशल मीडिया पर काफी विरोध होना शुरू हो गया। इसके बाद शनिवार देर रात नगर निगम ने इन तमाम बैनरों को हटवा दिया। नगर आयुक्त के पीआरओ अजय श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार देर शाम राप्ती नदी पुल के जालियों पर लगाए गए सभी बैनरों को हटवा दिया गया है।
संक्रमित मरीजों की मौत और आंकड़ों में है काफी फर्क
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो आंकड़ा रोजाना जारी किया जाता है उसमें कोरोनावायरस के संक्रमण की वजह से मौतों की संख्या और अंत्येष्टि स्थल पर नगर निगम की ओर से शवों के दाह संस्कार के लिए जारी टोकन में आठ से 10 गुना का फर्क होता है। वहीं यूपी के श्मशान घाटों से अक्सर ऐसी तस्वीरें और वीडियो आते रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में चिताएं जलती दिखाई रही हैं।
गोरखपुर नगर निगम ने बैनर लगाकर यह जताने की कोशिश की है अगर आपने यहां पर तस्वीरें ली तो पकड़े जाने पर आपके ऊपर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. हालांकि, जब इन बैनरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई और सरकार की आलोचना शुरू हुई। बेतियाहाता के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने भी नगर निगम के इस कदम का पुरजोर विरोध किया था और तत्काल इस पर रोक हटाने की मांग की थी। वहीं सोशल मीडिया पर विरोध होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने रातों रात इन बैनरों को हटा दिया गया।