गोरखपुर में सितंबर माह के आखिर में दो दिनों की झमाझम बारिश ने जिले से गुजरने वाली नदियों में उफान ला दिया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। उनका कहना है कि सितंबर के आखिर में इस तरह से कभी बाढ़ नहीं आई।
गोरखपुर: सितंबर के आखिर में कभी नहीं आई इस तरह ‘बाढ़’, तस्वीरों में देखें नदियां एक बार फिर उफान पर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल के पहाड़ों पर हुई बारिश का सबसे अधिक असर रोहिन नदी पर हुआ है। यह शुक्रवार को खतरे के निशान से 1.6 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। चंद रोह पहले यह नदी खतरे के निशान से तीन मीटर नीचे थी।
राप्ती भी तेजी से बढ़ती हुई खतरे के निशान से मात्र 43 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। इसी तरह से अन्य नदियों का भी जलस्तर बढ़ रहा है। घाघरा नदी अयोध्या में खतरे के निशान से 1.52 मीटर नीचे बह रही है। जबकि बरहज में यह खतरे के निशान से मात्र 20 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। हालांकि इसका जलस्तर शुक्रवार शाम तक स्थिर था। कुआनो और गोर्रा का भी जलस्तर बढ़ रहा है लेकिन दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने कहा कि सितंबर के अंत में इस तरह कभी बाढ़ देखने को नहीं मिली है। नदियां खतरे के निशान से तीन मीटर तक नीचे चली गई थीं। इतना तेज पानी बरसा की दो दिन रोहिन जैसी नदी खतरे के निशान से एक मीटर से अधिक ऊपर बहने लगी। अभी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है लेकिन चिंता की बात नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है। तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
डोमिनगढ़ के पास राप्ती में मिलती है रोहिन
गोरखपुर मंडल में बहने वाली सभी प्रमुख नदियां नेपाल के पहाड़ से निकलकर मैदानी क्षेत्र में आती हैं। रोहिन नदी नेपाल से निकल कर महराजगंज होते हुए डोमिनगढ़ के पास आकर राप्ती में मिलती है। पोखरा बुटवल की तरफ अधिक बारिश होने के कारण रोहिन में तेजी से पानी आया। नदी का अधिक फैलाव नहीं होने से जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। राप्ती भी नेपाल से निकलकर बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर होते हुए गोरखपुर पहुंचती है। यह पटना घाट के पास घाघरा में मिल जाती है।