गोरखपुर मंडल के राप्ती और सरयू नदी के कछार और दियारा में बाढ़ विभीषिका झेल रहे लोगों को दो जून की रोटी और दवा सहित पशुओं के लिए भूसे का संकट उत्पन्न हो गया है। बड़हलगंज क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया। चारों तरफ जलमग्न दर्जनों गांव के लोग किसी तरह दिन गुजार रहे हैं।
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Gorakhpur Flood
- फोटो : अमर उजाला।
लोगों को पेट भर भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है। रूखा सूखा खाकर रात काटनी पड़ रही है। पीने के लिए शुद्ध पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। बाढ़ के पानी से घिरी करीब दो लाख की आबादी को नमक, तेल, लकड़ी सहित पशुओं के लिए चारे की परेशानी शुरू हो गई है। जलमग्न गांवों में प्रशासन की ओर से राहत सामग्री और दवाइयां नहीं पहुंचाई गईं।
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मुजौना गांव के पास मेन लाइन के हाईटेंशन तार पर पेड़ की डाल गिरने से 56 गांव में बिजली नहीं है। संचार सेवा भी ठप है। गांव तक नाव नहीं पहुंचने से पीड़ित जरूरत का सामान लेने भी नहीं जा पा रहे हैं। पीड़ितों के लिए माचिस, मोमबत्ती, भूसा और केरोसिन जैसी जरूरतों को प्रशासन अब तक पूरा नहीं कर सका।
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बगहा के रामदुलारे, जगदीशपुर की उर्मिला देवी, लखनौरी की पार्वती देवी, बगहा देवार के सूर्यनाथ, कोलखास की मुक्खा गौड़, राजेश, अशोक, पारस, संजू, कलावती, मिंता की झोपड़ी पानी से घिरी है। इन लोगों के घर में राशन खत्म हो रहा है। थोड़ा चावल बचा है जिससे एक वक्त का काम चल रहा है।
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इन लोगों का कहना है कि गांवों में पल-पल हालत बिगड़ रहे हैं। लोग बाढ़ का पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। उनके इलाज की व्यवस्था नहीं है। गांव में डॉक्टर की टीम और राहत सामग्री नहीं आई तो संकट और गहराएगा।