फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

गोरखनाथ मंदिर से निकल सकता है भारत-नेपाल सीमा विवाद का रास्ता, ये है बड़ी वजह

Fri, 12 Jun 2020 08:28 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Jun 2020 08:28 AM IST
सार

  • नेपाल के राज परिवार और जनता की गोरक्षपीठ में गहरी आस्था
  • अब भी पहली खिचड़ी राज परिवार की चढ़ती है, राज परिवार भी मंदिर आ चुका है 

विज्ञापन
Gorakhnath temple will be solve border dispute between india and nepal
गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : Amar Ujala

नेपाल से सीमा विवाद के बीच रास्ता निकलने की उम्मीद गोरक्षपीठ व नाथ पंथ से जुड़ी है। गोरखनाथ मंदिर में नेपाल के राज परिवार और जनता की गहरी आस्था है। नेपाल और नाथ पंथ एक दूसरे में रचे बसे हैं। नेपाल के सत्ताधारी नेता भले ही चीन की भाषा बोलते हैं लेकिन नेपाल की जनता भारतवासियों से अच्छे संबंधों की पक्षधर है।

Gorakhnath temple will be solve border dispute between india and nepal
बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

नेपाल की जनता गोरक्षपीठ को पूजती है। ऐसे में गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से नेपाल सरकार को चेतावनी का बड़ा मतलब निकाला जा रहा है। इसका दबाव नेपाली सरकार भी महसूस कर रही है। इसी लिहाज से प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सामने आकर बयान देना पड़ा। दरअसल, गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा था कि अपनी राजनीतिक सीमा तय करने से पहले नेपाल को तिब्बत का हश्र याद रखना चाहिए।

Gorakhnath temple will be solve border dispute between india and nepal
बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी कहते हैं कि नेपाल से गोरक्षपीठ का संबंध सैकड़ों वर्ष पुराना है। नेपाल के राजा, रानी गोरखनाथ मंदिर आकर गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन-पूजन कर चुके हैं। गोरखनाथ मंदिर के मेले में अब भी पहली खिचड़ी नेपाल के राजपरिवार की चढ़ती है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Gorakhnath temple will be solve border dispute between india and nepal
बाबा गोरखनाथ की आरती करते सीएम योगी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

दरअसल, भगवान गोरखनाथ ने नेपाल के राज परिवार को आशीर्वाद दिया था। इससे राजवंश फल-फूल रहा था। प्रगाढ़ रिश्ते का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गुरु गोरक्षनाथ की चरण पादुका को नेपाल के राज परिवार ने अपने राजमुकुट में जगह दी है। नेपाल के सिक्के पर गुरु गोरक्षनाथ (श्रीश्री गोरखनाथ) का नाम लिखा है। गुरु गोरक्षनाथ के गुरु मत्यसेंद्र नाथ के नाम पर उत्सव मनाया जाता है। अपने शौर्य और पराक्रम से देश, दुनिया में अपना नाम रोशन करने वाली गोरखा रेजिमेंट भी गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर गठित हुई थी। राज परिवार अब भी गुरु गोरक्षनाथ को अपना राजगुरु मानता है।

विज्ञापन
Gorakhnath temple will be solve border dispute between india and nepal
गुरु गोरक्षनाथ
खिचड़ी मेला के दौरान पहली खिचड़ी नेपाल के राज परिवार की चढ़ती है। बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु गोरखनाथ आते हैं। खिचड़ी चढ़ाने के बाद पूजा-पाठ करके जाते हैं। राजनीति के जानकार कहते हैं कि इस वक्त यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। वही गोरक्षपीठाधीश्वर व नाथपंथ के प्रमुख महंत भी हैं।ऐसे में सीमा विवाद का रास्ता निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। गोरक्षपीठाधीश्वर की हर बात को नेपाल की जनता गंभीरता से लेती है। मुख्यमंत्री की पहल पर ही अयोध्या से नेपाल के सीता माता के जन्म जनकपुरी तक बसा सेवा शुरू की गई।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed