आज हम आपको यूपी के एक ऐसे मंदिर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसके मुख्य द्वार पर ही 17 तीर्थ स्थानों के दर्शन हो जाते हैं। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित है। इस मंदिर का नाम गीता प्रेस है। इसके मुख्य द्वार पर कई तीर्थों के दर्शन एक साथ हो जाते हैं। दुनिया में ऐसा कोई दूसरा द्वार नहीं है जिसमें एक साथ इतने तीर्थों के दर्शन हो सके। चारों दिशाओं से यह द्वार अनूठा दिखता है। वैसे तो गीता प्रेस की ख्याति उसकी पुस्तकों की वजह से पूरे विश्व में है, लेकिन जो लोग गीता प्रेस आते हैं वह इसके मुख्य द्वार के सामने शीश नवाना नहीं भूलते हैं। गीता प्रेस के मुख्य द्वार पर हिंदू के साथ बौद्ध, जैन एवं सिख धर्मों के पूजा स्थलों का समावेश है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग गोरखपुर आते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
तस्वीरें: दुनिया का सबसे अनोखा है ये मंदिर, यहां मुख्य द्वार पर ही होते हैं तीर्थ स्थानों के दर्शन
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गीता प्रेस का प्रवेश द्वार भूमि से शिखर तक 13 मीटर ऊंचा है। इसकी चौड़ाई 12 मीटर है। यह द्वार खंडों में बनाया गया है। प्रथम खंड में भूमि पर स्थित खंभे हैं, जो दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध गुफा मंदिर, एलोरा के खंभों के आधार पर बने हैं।
इसी खंड के ऊपर प्रेस का नाम तथा स्थापना काल हिंदी एवं अंग्रेजी में लिखा गया है। दूसरा खंड द्वार का मुख्य खंड है। द्वार का मुख्य आकर्षण इस खंड पर बना संगमरमर से बनाया चार घोड़ों का रथ है, जिस पर भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन विराजमान हैं। इस रथ का वजन लगभग 15 कुंतल है। यह मूर्ति जयपुर से बनवाकर मंगाई गई थी। तीसरे खंड में चंद्रमा के चित्र के साथ तमाम मंदिरों के दर्शन होते हैं।
द्वार में इन तीर्थों के होते हैं दर्शन
गीता प्रेस के मुख्य द्वार में अजंता जलगांव, एलोरा औरंगाबाद, दक्षिणेश्वर कोलकाता, काशी विश्वनाथ वाराणसी, द्वारिकाधीश मंदिर मथुरा, जगन्नाथ मंदिर पुरी उड़ीसा, लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर, श्रीराम जानकी मंदिर जनकपुर, सूर्य मंदिर कोणार्कं, मीनाक्षी मंदिर मदुरा, स्वर्ण मंदिर अमृतसर, खजुराहो, सांची, आबू राजस्थान, महाकाल उज्जैन, केदारनाथ उत्तराखंड, बुद्ध गया बिहार के दर्शन लोगों को होते हैं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था उद्घाटन
गीता प्रेस के मुख्य द्वार का उद्घाटन 23 अप्रैल 1955 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। उन्होंने द्वार को देख इसकी खूब प्रशंसा की थी।
गीता प्रेस उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि गीता प्रेस के जैसा द्वार कहीं और नहीं है। गीता प्रेस दर्शन के लिए जो भी पर्यटक आते हैं वह इसके द्वार को देखकर इसकी प्रशंसा करते नहीं थकते। कहीं न कहीं यहां की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकों के साथ यह द्वार भी गीता प्रेस की पहचान है।