सैकड़ों वर्ष पूर्व कोपिया (अनुपिया) में राजा शुद्धोधन का राजमहल था। यही से ज्ञान की तलाश में गौतम बुद्ध आमी नदी के किनारे वस्त्र त्याग कर निकल पड़े थे। विश्व के विभिन्न देशों में बौद्ध के अनुयायियों की तादात काफी है। पर्यटन स्थल के रूप में इस जगह को विकसित किया जाए तो यह श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।
ज्ञान की खोज में यहां से निकले थे गौतम बुद्ध, खुदाई के दौरान मिले थे ये साक्ष्य
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संतकबीरनगर जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोपिया स्थित बुद्ध का टीला है। मान्यता है कि राजा शुद्धोधन के पुत्र सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) दुख का कारण व निवारण और शांति के लिए राजमहल को छोड़कर अपने रथ पर सवार होकर सारथी के साथ अनोमा नदी (वर्तमान में आमी नदी) के किनारे पहुंचे थे। आमी नदी में स्नान कर राजसी वस्त्र त्याग कर संयासी का रूप धारण कर लिए थे। आभूषण व राजसी वस्त्र को त्यागकर अपने सारथी को देकर उसे राजमहल वापस भेज दिए थे।
क्षेत्र के राघवेंद्र सिंह, मानसिंह, रामनिधि तिवारी बताते है कि इस टीले पर वर्ष 2004 में एशिया के मशहूर रिसर्च सेंटर डेकन यूनिवर्सिटी पुणे महाराष्ट्र के प्रोफेसर आलोक कुमार ने लगातार पांच वर्षों तक रिसर्च कार्य करते हुए टीले की खुदाई कराई थी। खुदाई के दौरान बौद्ध कालीन सिक्के, गौतम बुद्ध की मूर्ति, शीशा समेत तमाम अवशेष मिले थे।
यहां पर बौद्ध काल में शीशे का कारोबार होने के भी प्रमाण मिले थे। टीले से कुछ ही दूरी पर शीशा बनाने की भट्ठियां भी मिली थीं। आसपास खेतों से भी शीशे के टुकड़े मिले थे। यहां के बने शीशे बेहद ही उम्दा गुणवत्ता के होते थे। यह बात शोध में सामने आई थी।
बौद्ध सर्किट से जोड़ने से बढ़ेगा आकर्षण
बौद्ध कालीन टीले के साथ प्राचीन शिव मंदिर यहां मौजूद है। टीले के सरंक्षण के साथ यहां गेस्ट हाउस और दूसरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव बना है। इस स्थल को बौद्ध सर्किट से जोड़ने के बाद श्रीलंका, जापान, चीन के बौद्ध अनुयायियों का यहां आवागमन होगा। बुद्ध से जुड़े स्थलों के विकास के लिए बौद्ध सर्किट योजना पर कार्य प्रस्तावित है।
बुद्ध के जन्म से लेकर ज्ञान प्राप्ति, उपदेश, कर्मस्थली से लेकर महापरिनिर्वाण तक बौद्ध सर्किट के अंतर्गत आते हैं। इस सर्किट में आने वाले बुद्ध से जुड़े उन स्थलों को भी विकसित करने की योजना है। पिछले दिनों केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन स्थलों के चयन और विकास पर सहमति बनी, जो बौद्ध सर्किट में छूटे हुए हैं। इसमें कोपिया को भी शामिल किया गया है।