उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में रह रहे फ्रांसीसी परिवार को बुधवार को उत्तराखंड के लिए रवाना हो गया। अतिथि देवो भवः की परंपरा को कायम रखते हुए, विदेशी मेहमानों के सुखदुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले लोगों ने उनको हर्षोल्लास के साथ विदा किया। गांव की यादों को सहेजे हुए फ्रांसीसी परिवार बुधवार को कोल्हुआ उर्फ सिहोंरवा मंदिर से रवाना हो गया हुआ।
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फ्रांसीसी परिवार
- फोटो : अमर उजाला।
भारतीय परिवेश फ्रांसीसी परिवार को खूब भाया। लिहाजा परिवार मंदिर में भोलेनाथ की आराधना हो या मंदिर परिसर में जमीन पर बैठ कर भोजन ग्रहण करने व्यवस्था। दोनों ही फ्रांसीसी परिवार को खूब अच्छा लगा। वहीं परिवार के सदस्यों द्वारा ग्रामीणों के कार्य में हाथ बंटाना भी बहुत अच्छा लगा।
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french family
- फोटो : अमर उजाला।
फ्रांस के टूलूज शहर से जुलाई 2019 को 24 देशों के भ्रमण पर निकला फ्रांसीसी पहली मार्च को पाकिस्तान से बाघा बार्डर होते हुए भारत पहुंचा। जिसे भारत में विभिन्न स्थानों के भ्रमण के बाद नेपाल जाना था। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण नेपाल सीमा सील होने की दशा में वह नेपाल नहीं जा सके। लिहाजा पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोल्हुआ उर्फ सिहोंरवा स्थित एक मंदिर पर रूक गए। जहां समय बीतने के साथ साथ परिवार भारतीय संस्कृति में पूरी तरह ढ़लता गया।
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फ्रांसीसी परिवार
- फोटो : अमर उजाला।
आलम यह रहा कि अंग्रेजी बोलने वाला परिवार भोजपुरी में ग्रामीणों से बातचीत करते हुए हर रोज मंदिर में शिव आराधना करने में लीन रहने लगा। वहीं परिवार जमीन पर बैठ कर भोजन ग्रहण करने में भी आनंद की अनुभूति करने लगा। पेशे से मकैनिक परिवार का मुखिया पैट्रीस पैलेरस ग्रामीणों के साथ झोपड़ी रखवाने से लेकर खेतों में कार्य कर हाथ बंटाकर भारतीय सभ्यता को यादों में संजो गए।
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फ्रांसीसी परिवार
- फोटो : अमर उजाला।
पैट्रीस पैलेरस ने कहा कि भारत भ्रमण बहुत अच्छा लगा। कोरोना संक्रमण काल में यहां लोगों से बहुत प्रेम मिला। रहने के दौरान कभी ऐसा नहीं लगा की दूसरे देश में हूं। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। लोगों से इतना प्रेम मिला है कि अवसर मिलने पर बार-बार इस क्षेत्र में आऊंगा।