फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इंजीनियर बना गोसेवक: विदेश की नौकरी छोड़ नई आशा के शिल्पकार बने 'राहुल'

Sat, 06 Mar 2021 02:36 PM IST
vivek shukla शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 06 Mar 2021 02:36 PM IST
विज्ञापन
engineer became Gosevak after leaving his job abroad
राहुल राय। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में बचपन से गोसेवा और कृषि के प्रति लगाव की वजह से इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर राहुल राय ने डेयरी का संचालन शुरू कर दिया। अच्छी नस्ल की 40 गाय इनकी डेयरी में उपलब्ध हैं। रोज 125 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। खलीलाबाद शहर में डोर-डोर दूध की आपूर्ति कराते हैं। इस काम में छह लोगों को रोजगार भी दे रखा है। इसके अलावा तीन लोगों को बर्मी कंपोस्ट यूनिट में रोजगार दे रखा है।



 

engineer became Gosevak after leaving his job abroad
गाय के साथ राहुल राय। - फोटो : अमर उजाला।

शहर के बिधियानी मोहल्ले के रहने वाले 46 वर्षीय राहुल राय पुत्र त्रिशूलधर राय मैकेनिकल से बीटेक हैं। वर्ष-2000 में उन्हें इंजीनियर पद पर नौकरी मिली। विभिन्न कंपिनयों में दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान और विदेश में कुवैत, इटली, अबूधाबी में नौकरी की। वर्ष-2017 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और घर आ गए। तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके भाई रोहित राय दिल्ली में टैक्स सलाहकार और दूसरे भाई कुंदन राय इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। पिता त्रिशूलधर राय रतनसेन डिग्री कॉलेज बांसी से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं।

engineer became Gosevak after leaving his job abroad
राहुल ने गाय पालने का प्रशिक्षण लिया हुआ है। - फोटो : अमर उजाला।

राहुल राय बताते हैं कि उन्हें बचपन से पड़े-पौधों से लगाव और गायों की सेवा करने का शौक है। शौक को पूरा करने के लिए इसी को कॅरियर बना लिया और इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी है। नेशनल डेयरी इंस्टीट्यूट करनाल हरियाणा और पुणे के बारामरी में 15-15 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष-2018 में डेयरी खोली।

विज्ञापन
विज्ञापन
engineer became Gosevak after leaving his job abroad
राहुल ने चार गाय से शुरूआत की थी। - फोटो : अमर उजाला।

पहले चार गाय खरीदी और काम को समझा। उसके बाद धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाते गए। वर्तमान में होल्स्टीन फ्रिजियन, गिर और साहीवॉल नस्ल की छोटी-बड़ी 40 गाय उनकी डेयरी में हैं। देसी गायों का संबंद्ध करना उनका उद्देश्य है। गायों को हरा चारा खिलाते हैं। इसके अलावा जौ का आटा, मकई (मक्का) का आटा और अरहर का खंडा भी गरम कराकर आहार में देते हैं।

 

विज्ञापन
engineer became Gosevak after leaving his job abroad
राहुल के पास वर्तमान में 40 से अधिक से दूधारु गाय हैं। - फोटो : अमर उजाला।

डयेरी से प्रति महीने डेढ़ लाख की आय होती है। उसमें खर्च निकालने के बाद औसतन 40 हजार रुपये की बचत हो जाती है। उनके यहां जो लोग काम करते हैं उन्हें भी सात से आठ हजार रुपये महीने देते हैं। उनका कहना है कि खुद के रोजगार में चुनौतियां तो सामने आती हैं, लेकिन मेहनत और ईनानदारी से काम करें तो सफलता जरूर मिलती है।    

 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed