उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में बचपन से गोसेवा और कृषि के प्रति लगाव की वजह से इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर राहुल राय ने डेयरी का संचालन शुरू कर दिया। अच्छी नस्ल की 40 गाय इनकी डेयरी में उपलब्ध हैं। रोज 125 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। खलीलाबाद शहर में डोर-डोर दूध की आपूर्ति कराते हैं। इस काम में छह लोगों को रोजगार भी दे रखा है। इसके अलावा तीन लोगों को बर्मी कंपोस्ट यूनिट में रोजगार दे रखा है।
इंजीनियर बना गोसेवक: विदेश की नौकरी छोड़ नई आशा के शिल्पकार बने 'राहुल'
शहर के बिधियानी मोहल्ले के रहने वाले 46 वर्षीय राहुल राय पुत्र त्रिशूलधर राय मैकेनिकल से बीटेक हैं। वर्ष-2000 में उन्हें इंजीनियर पद पर नौकरी मिली। विभिन्न कंपिनयों में दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान और विदेश में कुवैत, इटली, अबूधाबी में नौकरी की। वर्ष-2017 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और घर आ गए। तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके भाई रोहित राय दिल्ली में टैक्स सलाहकार और दूसरे भाई कुंदन राय इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। पिता त्रिशूलधर राय रतनसेन डिग्री कॉलेज बांसी से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं।
राहुल राय बताते हैं कि उन्हें बचपन से पड़े-पौधों से लगाव और गायों की सेवा करने का शौक है। शौक को पूरा करने के लिए इसी को कॅरियर बना लिया और इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी है। नेशनल डेयरी इंस्टीट्यूट करनाल हरियाणा और पुणे के बारामरी में 15-15 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष-2018 में डेयरी खोली।
पहले चार गाय खरीदी और काम को समझा। उसके बाद धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाते गए। वर्तमान में होल्स्टीन फ्रिजियन, गिर और साहीवॉल नस्ल की छोटी-बड़ी 40 गाय उनकी डेयरी में हैं। देसी गायों का संबंद्ध करना उनका उद्देश्य है। गायों को हरा चारा खिलाते हैं। इसके अलावा जौ का आटा, मकई (मक्का) का आटा और अरहर का खंडा भी गरम कराकर आहार में देते हैं।
डयेरी से प्रति महीने डेढ़ लाख की आय होती है। उसमें खर्च निकालने के बाद औसतन 40 हजार रुपये की बचत हो जाती है। उनके यहां जो लोग काम करते हैं उन्हें भी सात से आठ हजार रुपये महीने देते हैं। उनका कहना है कि खुद के रोजगार में चुनौतियां तो सामने आती हैं, लेकिन मेहनत और ईनानदारी से काम करें तो सफलता जरूर मिलती है।