गोरखपुर में कोरोना महामारी के बीच इंसेफेलाइटिस के मरीजों में काफी कमी आई है। पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक बेहद कम मरीज मिले हैं। एक जनवरी से लेकर छह जुलाई के बीच केवल 31 मरीज जिले में मिले हैं। साथ ही चार मरीजों की मौत हुई है। गोरखपुर मंडल की बात करें तो पिछले छह माह में 11 मासूमों की मौत हो चुकी है। जबकि 147 मरीज जेई और एईस के मिल चुके हैं।
राहत: कोविड के बीच इंसेफेलाइटिस के मरीज भी हो रहे कम, सीएम योगी के प्रयासों से सिमट रहा रोग
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इंसेफेलाइटिस के मामले में कुशीनगर जिला हमेशा एक नंबर पर रहता था, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों की देन है कि यहां मरीज पहले की अपेक्षा कम हुए हैं। जबकि महराजगंज में 32 मरीज मिले हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व एसआईसी रहे डॉ. पीएन श्रीवास्तव कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इंसेफेलाइटिस की समस्या को लेकर शुरू से ही गंभीर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका सारा ध्यान इंसेफेलाइटिस को लेकर ही रहा।
यही वजह है कि बीते चार साल में इंसेफेलाइटिस पर काफी अंकुश लगा है। इसके लिए जहां सीएचसी और पीएचसी को सक्रिय किया गया है। इसका परिणाम सामने दिख रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा और डॉ. ओएन श्रीवास्तव की माने तो पूर्वांचल से अब इंसेफेलाइटिस का कहर पूरी तरह से हल्का हुआ है। ऐसा सिर्फ जागरूकता और इलाज को लेकर गंभीरता के कारण हुआ है। कहा कि जब शुद्ध पेयजल, साफ-सफाई का पूरी तरह से ध्यान होगा तो यह बीमारी अपने आप सिमट जाएगी।
जापानी इंसेफेलाइटिस के मिले छह मरीज
जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर भी पूर्वांचल में जोरों पर था, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के बढ़ने के कारण इन मरीजों की संख्या में भी काफी कमी आई है। इस बार सिर्फ छह मरीज मिले हैं। इनमें चार कुशीनगर तो दो देवरिया जिले के मरीज शामिल हैं।
वर्ष- पीड़ित मौत
2017 2990 378
2018 1279 125
2019 935 52
2020 169 10