गोरखपुर जिले में इंसेफेलाइटिस के साथ वायरल फीवर और निमोनिया ने भी दस्तक दे दी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों के वार्ड में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। 458 बेड वाले वार्ड में मंगलवार तक 330 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जिस तेजी से बच्चों की संख्या बढ़ रही है, तीन से चार दिनों में वार्ड फुल हो जाएगा। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बच्चों को बिना वजह बाहर लेकर न निकलें।
नया संकट: इंसेफेलाइटिस के साथ वायरल फीवर और निमोनिया की दस्तक, अब डॉक्टर दे रहे हैं यह सलाह
डॉक्टर दे रहे हैं सलाह, बच्चों को बाहर बिल्कुल न भेजें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस संकट के बीच वायरल फीवर, निमोनिया ने चिंता और बढ़ा दी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि बीमार बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। कई मामलों में तो बच्चों को 103 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार हो जा रहा है। इसके कारण उनके मानसिक स्थिति में बदलाव आ रहा है। इस वजह से भी इंसेफेलाइटिस के मामले बढ़ने की आशंका है।
नवजातों में निमोनिया और वायरल फीवर के मामले ज्यादा
डॉ. अनीता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में 118 नवजात भर्ती हैं। इनमें निमोनिया और वायरल फीवर की समस्या अधिक है। साथ ही कुछ में पीलिया के भी लक्षण मिले हैं। इसके अलावा ओपीडी में भी वायरल फीवर के मरीज आ रहे हैं। औसतन देखा जाए तो हर पांच में दो बच्चा वायरल फीवर से पीड़ित मिल रहा है। राहत की बात बस इतनी है कि इनमें किसी बच्चे की मौत अब तक नहीं हुई है। न ही अब तक फिरोजाबाद, आगरा और मथुरा की तरह कोई केस मिले हैं।
कुछ बच्चों में सांस लेने में भी तकलीफ की शिकायतें मिली है। इन बच्चों की जांच की गई है तो पता चला कि इनमें निमोनिया का असर ज्यादा है। इसके अलावा फेफड़े भी संक्रमण की चपेट में हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि इनमें कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पाण्डेय ने कहा कि इस वर्ष इंसेफेलाइटिस के मामले आंशिक रुप में बढ़े हैं। राहत की बात यह है कि इसमें जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले अब तक नहीं मिले हैं। सभी मरीज एईएस के हैं। एईएस की कई वजह हो सकती है। फिलहाल सभी का इलाज चल रहा है।