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मौत को दी मात: 90 प्रतिशत फेफड़े हो गए थे खराब, डॉक्टरों की बदौलत बच गई जिंदगी

Thu, 15 Jul 2021 12:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 15 Jul 2021 12:41 PM IST
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Doctors saved patient life after 90 percent of lungs damaged in BRD Medical College Gorakhpur
बीआरडी मेडिकल कॉलेज व सुजीत पाठक। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमित शिक्षक का 90 प्रतिशत फेफड़ा खराब होने के बाद भी बीआरडी के डॉक्टरों ने मरीज की जिंदगी बचा ली। ढाई महीने तक कोविड और पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती होने के बाद शिक्षक अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गए हैं। पूरे परिवार ने बीआरडी के डॉक्टरों के प्रति आभार जताया है।


जानकारी के मुताबिक राप्ती नगर के रहने वाले सुजीत पाठक (42) बिहार के बेतिया में शिक्षक हैं। कोरोना की दूसरी लहर में वह 21 अप्रैल को संक्रमित हो गए। इस बीच हालत बिगड़ी तो परिजनों ने इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती कराया। संक्रमण का असर ऐसा था कि मरीज के फेफड़े 90 प्रतिशत खराब हो गए। इस स्थिति को लंग्स फाइब्रोसिस कहते हैं। इस कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। करीब एक महीने तक वेंटिलेटर पर रहने के कारण उन्हें बैरोट्रॉमा की दिक्कत हो गई।
Doctors saved patient life after 90 percent of lungs damaged in BRD Medical College Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
इस कारण उन्हें डॉक्टरों ने वेंटिलेटर से उतारकर ऑक्सीजन सपोर्ट पर शिफ्ट कर दिया। इस बीच सुजीत के दोनों फेफड़ों के बीच और फेफड़ों के बाहर झिल्ली में भी हवा घुस गई। इससे उनकी हालत और नाजुक हो गई। लेकिन सुजीत को बीआरडी के डॉक्टर हिम्मत देते रहे। 
Doctors saved patient life after 90 percent of lungs damaged in BRD Medical College Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
इसका नतीजा यह हुआ कि करीब डेढ़ माह के बाद वह कोविड से मुक्ति पा गए। हालांकि उनकी ऑक्सीजन की जरूरत बनी रही। इसके बाद डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। इस बीच मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. महिम मित्तल, डॉ. राजकिशोर सिंह और डॉ. अजहर अली की देखरेख में सुजीत को पोस्ट कोविड वार्ड में शिफ्ट किया गया। जहां उन्हें ऑक्सीजन दिया जाता रहा। 
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Doctors saved patient life after 90 percent of lungs damaged in BRD Medical College Gorakhpur
डॉ राजकिशोर सिंह - फोटो : अमर उजाला।
डॉ. राज किशोर सिंह ने बताया कि मरीज का फेफड़ा 90 प्रतिशत तक खराब हो चुका था। इसके अलावा अन्य दिक्कतें भी हो गईं थीं। लेकिन लगातार मरीज की निगरानी डॉक्टरों की टीम करती रही। जिसका असर यह हुआ कि मरीज जुलाई माह में डिस्चार्ज होकर घर चला गया। मरीज का फॉलोअप भी लगातार किया जा रहा है। अब वह ठीक हैं।
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Doctors saved patient life after 90 percent of lungs damaged in BRD Medical College Gorakhpur
सुजीत पाठक। - फोटो : अमर उजाला।
डॉक्टर देते रहे हिम्मत और जीत ली जंग
सुजीत ने बताया कि उनकी स्थिति बेहद बिगड़ गई थी। परिजन निराश हो गए थे। खुद मैं भी टूट चुका था। लेकिन बीआरडी के डॉक्टर और कर्मियों का हौसला देना मुझे रोज नई ऊर्जा दे रहा था। जिसकी बदौलत मैं कोरोना से लड़ता रहा। अंत में जीत मेरी हुई। यह जीत डॉक्टरों की बदौलत मिली। सुजीत के परिजनों ने डॉ. राज किशोर सिंह, डॉ. महिम मित्तल, डॉ. अजहर अली और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति आभार जताया है।
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