कोरोना संक्रमण काल के दौर में यू-ट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस समय कोरोना के लक्षणों पर उपचार के कई नुस्खे और दवाइयां वायरल हो रहीं हैं। अंग्रेजी के अलावा होम्योपैथिक दवाएं वायरल कर उसके इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टर के परामर्श इन दवाओं का सेवन खतरनाक हो सकता है।
सावधान: सोशल मीडिया नहीं डॉक्टरों के परामर्श से ले दवाएं, वरना हो सकता है नुकसान
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फेसबुक पर तो बहुत सारे लोग दवाओं और कंपनी का नाम वायरल कर उसके इस्तेमाल से फौरन ठीक होने का दावा भी कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग देसी नुस्खों में फिटकारी का पानी पीने, लौंग व तुलसी पत्ता को उबालकर पीने की सलाह दे रहे हैं। कुछ लोग कपूर, लौंग व अजवाइन का मिश्रण नाक में डालने से जुकाम ठीक होने की बात शेयर कर रहे हैं।
वहीं किसी ने अक्टेमरा नामक इंजेक्शन को कारगर बताया है तो किसी ने अमृतशक्ति दवा को रामबाण बताया है। ऑक्सीजन स्तर गिरने पर होम्योपैथिक दवा एस्पीडोस्परमा क्यू 20 की सलाह दी गई है। हैरान करने वाली बात ये कि सारे सुझाव आम लोगों के हैं, किसी एक्सपर्ट के सुझाव नहीं हैं।
एक्सपर्ट की राय
शहर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. धीरज सिंघानिया कहते हैं कि इस समय कोरोना के लक्षण की तरह टायफायड, वायरल आदि की भी बीमारियां भी हैं। ऐसे में बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाएं लेना खतरनाक हो सकता है। बहुत सारी दवाएं सोशल मीडिया पर शेयर की गई हैं, लेकिन मरीज को क्या दिक्कत है, यह जाने बिना एक ही दवा सभी को नहीं दी जा सकती है।
डॉ. रूप कुमार बनर्जी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर कोरोना को लेकर ढेरों दवाएं लोग वायरल कर रहे हैं। लेकिन, होम्योपैथिक दवाएं केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की सलाह से ही लेने की जरूरत है। होम्योपैथी में हर व्यक्ति के लक्षणों के आधार पर चिकित्सक द्वारा रोगी की उम्र, रोग की दशा व गंभीरता, जांच आदि को दृष्टिगत रखते हुए अलग-अलग औषधि व उसकी खुराक निर्धारित की जाती है। इसलिए होम्योपैथी में सबके लिए एक ही स्वास्थ्य समस्या के लिए एक ही सामान्य औषधि देना संभव नहीं है।