ब्राह्मण बहुल देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के नतीजे संकेत देंगे कि ‘भगवान परशुराम’ के वंशज का झुकाव किस पार्टी की ओर है। इस सीट से सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। सबके जीत के अपने-अपने दावे भी हैं।
देवरिया उपचुनाव: चुनावी नतीजे बताएंगे ‘भगवान परशुराम’ के वंशज का झुकाव किस ओर
कानपुर के बिकरू कांड के बाद प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति को गर्माने का प्रयास हुआ था। राजनीतिक दलों ने आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए थे। इसी बीच विधानसभा उपचुनावों का एलान कर दिया गया। तीन नवंबर को मतदान हुआ। अब बारी नतीजों की है। मंगलवार को नतीजे आएंगे, ऐसे में सबकी निगाहें देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के नतीजों पर टिकी हैं।
इस सीट से भाजपा, सपा, कांग्रेस व बसपा के उम्मीदवार ब्राह्मण हैं। राजनीतिक दलों की ओर से कहा जा रहा है कि जिस उम्मीदवार को ब्राह्मणों का अच्छा वोट मिलेगा, वह निर्णायक बढ़त बना सकता है। इसी का नतीजा है कि देवरिया विधानसभा क्षेत्र के नतीजों को परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। यदि भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली तो विपक्ष की जातिगत राजनीति को झटका लगेगा। भाजपा विकास के मुद्दे को हवा देगी और विपक्ष को आइना दिखाने की कोशिश करेगी।
सर्वाधिक ब्राह्मण मतदाता, फिर वैश्य
इस क्षेत्र में 3,36,565 मतदाता हैं। राजनीतिक दलों के पास जो जातिगत आंकड़ा है उसके मुताबिक सर्वाधिक 50-55 हजार मतदाता ब्राह्मण हैं। 45-50 हजार वैश्य, 55-60 हजार यादव-मुस्लिम, 20-22 हजार क्षत्रिय, 18-20 हजार निषाद मतदाता हैं। चौरसिया, मौर्या सहित अन्य पिछड़ा वर्ग के भी मतदाताओं की संख्या अच्छी है।
चुनाव चिह्न कोई, त्रिपाठी ही पहुंच सकते हैं विधानसभा
यह पहला मौका है, जब देवरिया विधानसभा क्षेत्र से प्रमुख राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे हैं। सभी त्रिपाठी हैं। कहा जा रहा है कि चुनाव चिह्न कोई भी हो, अगर प्रमुख दलों के प्रत्याशियों में से किसी को जीत मिली तो त्रिपाठी ही चुनकर विधानसभा में जाएंगे। निर्दलीय प्रत्याशियों की अप्रत्याशित जीत हुई तो ही इसमें किसी तरह का बदलाव संभव है।