देवों की धरती देवरिया के मईल गांव में सरयू तट के किनारे सिद्ध भूमि बनाने वाले महर्षि देवरहा बाबा अपने आप में अद्भुत थे। देवरिया जनपद मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिणांचल के अंतिम छोर पर मईल गांव के पास बाबा का आश्रम है। यहां बाबा देवरहा छोटे से काठ के मंच पर बैठकर लोगों को दर्शन देते थे।
तस्वीरें: अपने आप में अद्भुत थे महायोगी देवरहा बाबा, इनके आगे देश के पीएम भी झुकाते थे सिर
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बाबा ने सिद्ध हठयोगी अष्टांग योग की ख्याति अर्जित की थी। बाबा को प्लावन सिद्धि भी प्राप्त थी, जिससे वह पानी के ऊपर भी चलते थे। बाबा जिस भक्त को अपने पैर के अंगूठे से स्पर्श कर देते थे, वह धन्य हो जाता था।
बाबा ऐसे दिव्य संत थे जो भक्तों की बात को पहले ही जान जाते थे। उन्हें आशीर्वाद देते थे। बाबा ने कभी अन्न का सेवन नहीं किया। वह हमेशा गंगाजल, दूध, दही, शहद व श्रीफल का प्रयोग करते थे।
वहीं उन्होंने 1990 में योगिनी एकादशी पर 19 जून को अपना शरीर त्याग दिया था। आश्रम के पीठाधीश्वर श्यामसुंदर दास ने बताया कि इस साल भी आश्रम पर उनकी पुण्यतिथि योगिनी एकादशी 5 जुलाई को मनाई जाएगी। आश्रम पर चलने वाला योग और वेद विद्यालय लगभग 6 वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बंद पड़ा है।