गोरखपुर में 20 नवंबर साल 2001 की वो मनहूस रात को शिवाजी नगर कालोनी के राकेश राय के घर में आठ लोग थे। इनमें से सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था, बस एक बचा था। आपको यकीन नहीं होगा, आज भी इस घर में आठ लोगों की मौजूदगी है। जानिए क्यों मोहल्ले वालों को सताता है डर? आखिर वो आठ लोग कौन हैं...?
जिस घर में हुए थे सात कत्ल, वहां आज भी रहते हैं आठ लोग, जानिए इनकी दर्दनाक कहानी
उस रात को घटी दिल दहला देने वाली घटना ने पलक झपकते, लोगों के दिलो-दिमाग में खौफ भर दिया था। कई साल तक राकेश के घर का ख्याल आते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते। उस दिन लाशों से रिस-रिस कर बहे खून से घर का फर्श लाल हो गया था। उस घर पर नजर पड़ते ही सांस धौंकनी-सी चलने लगती। पैर बेकाबू हो जाते, मन कहता भागो, इस घर में भूत है। एक नहीं पूरे सात-सात।
लोग कहानियां बनाने लगे, उस घर से रात में घंटी की आवाज आती है। किसी को पायल तो किसी को नाक से बोलने की आवाजें सुनाई पड़ती है। हालात ऐसे बन गए कि इस घर में रहना तो छोड़िए, कोई एक पल ठहरने की भी नहीं सोच सकता था। क्या इस घर में फिर कभी कोई नहीं आया ? क्या वह अब भी वीरान पड़ा है, उसमें मकड़ी के जालों का राज है? हां, इस घर में अब भी आठ लोग हैं, जिंदा इंसान। ये है, बड़हलगंज के सरया मोहलिया के रहने वाले कवलभान यादव का परिवार।
कवलभान यादव मां दुर्गा के भक्त हैं, उन्हें भूतों पर यकीन नहीं। पांच साल पहले उन्होंने यह घर खरीद लिया। ऐसा नहीं था कि कवलभान उस दिल दहला देने वाली घटना से बेखबर थे। वे कहते हैं, सब बकवास है। भूतप्रेत कुछ नहीं होता है। हो सकता है कि किसी के लिए होता हो, मगर मुझे देखिए ठाठ से रहता हूं। वह बताते हैं कि घर में पत्नी, दो बहू और उनके बच्चे कुल आठ लोग रहते हैं। हमें आज तक कोई आवाज सुनाई नहीं पड़ी है।
आचार्य गोविवि मनोविज्ञान विभाग के डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि भूत-प्रेत मनोस्थिति का रूप है। विश्वास का बड़ा प्रभाव मनोस्थिति पर पड़ता है। इसे मनोविज्ञान में विभ्रम कहते हैं। मसलन कोई वस्तु नहीं दिख रही है लेकिन फिर भी लगता है कि कुछ है। जो लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं वे इस मनोरोग के ज्यादा शिकार होते हैं। वहीं जो मानसिक रूप से मजबूत हैं वे भूत-प्रेत नहीं मानते हैं। उनके साथ विभ्रम जैसी स्थिति नहीं होती है।