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Exclusive: डार्क वेबसाइटों पर सजा कोरोना वैक्सीन का बाजार, भूलकर भी ना करें ये काम
Fri, 25 Dec 2020 01:55 PM IST
vivek shukla
रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 25 Dec 2020 01:55 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : pixabay
कोरोना वैक्सीन के आने से पहले से ही साइबर अपराधियों ने डार्क वेबसाइटों पर कोरोना वैक्सीन और दवाओं का बाजार सजा दिया है। इंटरनेट पर साइबर अपराधियों के इस जाल की खबर लगते ही साइबर सेल ने अलर्ट जारी कर दिया है। सेल की सलाह है कि स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर आने वाली सूचनाओं को ही गंभीरता से लें और उन्हें ही सही मानें।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : pixabay
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश की राजधानी में ऐसे कुछ मामले सामने आने के बाद शासन की तरफ से भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। यह अलर्ट फर्जी वेबसाइट के माध्यम से वैक्सीन के अलावा कोरोना से निजात दिलाने के लिए अन्य दवाओं के नाम पर ऑनलाइन ठगी को लेकर है। पता चला है कि साइबर अपराधी डार्क नेट के माध्यम से वेबसाइट पर आपकी सुविधा और जरूरत को देखते हुए कोरोना की दवाओं और वैक्सीन की उपलब्धता बताकर फ्रॉड करने में जुट गए हैं। इसके बदले वे लोगों से ऑनलाइन भुगतान मांग रहे हैं। जानकारी मिली है कि भुगतान होने के बाद ये वेबसाइटें बंद हो जाती है या गूगल सर्च इंजन से गुम हो जाती हैं। रुपये भुगतान करने वाले कुछ दिनों के इंतजार के बाद खुद को ठगा मानकर शांत बैठ जाते, या साइबर सेल में इसकी शिकायत भी करते हैं। ऐसे कुछ मामले लखनऊ साइबर क्राइम सेल के पास पहुंच भी गए हैं। इसके बाद, इसे लेकर पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : amar ujala
गोरखपुर साइबर सेल के प्रभारी निरीक्षक सूर्यभान सिंह ने बताया कि इन निजी वेबसाइटों पर भरोसा करना गलत है। दवाओं या वैक्सीन के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही पंजीकरण कराने के बाद वैक्सीन या अन्य दवाओं के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल ऐसे मामले गोरखपुर में सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसे लेकर अलर्ट किया गया है। साइबर सेल गूगल व बिंग सर्च इंजन पर नजर बनाए हुए हैं। इन फर्जी वेबसाइटों की पड़ताल करके उनको भी सूचीबद्ध किया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
जानिए क्या है डार्क नेट
इंटरनेट पर कई वेबसाइटें होती हैं जो आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले गूगल या बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउजिंग की पहुंच में नहीं होती है। इन्हें ही डार्क नेट या डीप नेट कहते हैं। सामान्य वेबसाइटों से अलग यह एक ऐसा नेटवर्क होता है, जिस तक चुनिंदा समूहों की ही पहुंच होती है। इसका नियंत्रण पूरी तरह उन्हीं के हाथों में होता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से इंटरनेट के माध्यम से गलत कामों या डेबिट क्रेडिट कार्ड प्रयोग कर ठगी करने में किया जा रहा है।
इंटरनेट पर कई वेबसाइटें होती हैं जो आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले गूगल या बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउजिंग की पहुंच में नहीं होती है। इन्हें ही डार्क नेट या डीप नेट कहते हैं। सामान्य वेबसाइटों से अलग यह एक ऐसा नेटवर्क होता है, जिस तक चुनिंदा समूहों की ही पहुंच होती है। इसका नियंत्रण पूरी तरह उन्हीं के हाथों में होता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से इंटरनेट के माध्यम से गलत कामों या डेबिट क्रेडिट कार्ड प्रयोग कर ठगी करने में किया जा रहा है।
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एसपी त्रिवेणी सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
साइबर क्राइम सेल एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम सेल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। देश और प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें। इसके अलावा किसी अन्य साइट पर भरोसा न करें। जालसाज इंजेक्शन लगाने, पहले वैक्सीन लगाने, नकली वैक्सीन को बेचने के लिए डार्क नेट का सहारा लेते हैं। इसे लेकर पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है।