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हुआ खुलासा: कैसे चुटकियों में फर्जी ई टिकट बुक करता था हामिद गैंग? कैसे करोड़ों का लेनदेन?
Sun, 02 Feb 2020 09:16 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बस्ती
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बस्ती
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 02 Feb 2020 09:16 PM IST
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तीनों आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला।
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टेरर फंडिंग मामले में वांछित चल रहे हामिद अशरफ के तीन साथियों के पकड़ में आने के बाद ई टिकटिंग के अवैध धंधे का भी पर्दाफाश हो गया था कि कैसे चुटकियों में फर्जी ई टिकट बुक कर दिए जाते थे और देशभर में एजेंट कैसे तैयार किए जाते थे? किस तरह करोड़ों का लेनदेन होता था, जिसकी कभी पुलिस को भनक तक नहीं लगी। जानिए, अपराध का पूरा तरीका और पूछताछ में आरोपियों ने क्या कबूला?
e ticket racket
- फोटो : amarujala
मऊ से गिरफ्तार हुए हामिद अशरफ के तीनों साथियों को आरपीएफ, सीआईबी व बस्ती पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में पकड़ा गया था। गिरफ्तार अभियुक्तों का नाम अमित गुप्ता (25) निवासी मझवारा थाना घोसी जिला मऊ, इंदरा थाना कोपागंज निवासी नंद कुमार गुप्ता (26), नदवा सराय थाना घोसी निवासी अब्दुल रहमान (32) शामिल थे। इनके पास तीन लैपटॉप, 5 मोबाइल, 261 तत्काल टिकट बरामद हुए, जिसकी कीमत 721635 लाख आंकी गई है।
e ticket racket
- फोटो : amarujala
अपराध का तरीका: उक्त गिरोह की ओर से आईआरसीटीसी के ई टिकट बुकिंग के लिये विशेष प्रकार का एएएमएस सॉफ्टवेयर व्हाट्सप ग्रुप के जरिये टिकट एजेंटों को मासिक किराये पर दिया जाता था l देश के विभिन्न हिस्सों से टिकट एजेंट को व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर सॉफ्टवेयर खरीद लेते थे, जिसे सॉफ्टवेयर आईडी और सॉफ्टवेयर को व्हाट्सएप लिंक से भेजते। सॉफ्टवेयर के मासिक किराये का भुगतान बैंक अकाउंट में हो जाता था।
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e ticket racket
- फोटो : amarujala
अभियुक्तों ने कबूला कि सॉफ्टवेयर हामिद अशरफ का है, उसके दो साथी महमूद और मनोज महतो हैंगआउट से चेटिंग कर पैनल, पासवर्ड, तथा सॉफ्टवेयर किराये पर देते हैं। जांच के दौरान किसी संदिग्ध पोर्टल औऱ अनेक बैंक खाता भी संज्ञान में आया, जिसमें पिछले एक साल में करोड़ों के लेनदेन का खुलासा हुआ। कई टिकट एजेंटों के भी नाम भी पता चले जो सॉफ्टवेयर की मदद से ई टिकट का व्यापार करते हैंl
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हामिद गिरोह के एक और ई-टिकटिंग के धंधेबाज को आजमगढ़ से दबोचा
- फोटो : amarujala
अभियुक्त से पूछताछ में हामिद अशरफ के मुख्य डेवलपर मेहमूद, चीफ सेलर राशिद खान तथा मनोज महतो फंड मैनजमेंट करना पाया गया l नेपाल सीमा से मात्र 4 किमी दूरी पर घर बनाकर रहते मनोज महतो ने सीतामढ़ी में अनेक दुकानों के नाम अलग अलग बैंक में फ़र्ज़ी पोर्टल खाते खोल रखे हैं जबकि धरातल पर उस नाम की दुकान है ही नहीं। सारी पेमेंट मनी ट्रांसफर के जरिये कैश लेकर साथियों तक पहुंच रही थी।