गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करके शनिवार को गोरखपुर से लखनऊ लौट गए। मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक किया और कोरोना वायरस की चुनौती से जूझ रही मानवता के कल्याण की कामना की। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि गुरु गोरक्षनाथ का सानिध्य शक्ति प्रदान करता है। अब मुख्यमंत्री कोरोना वायरस की चुनौती से और मजबूती से निपटेंगे।
बैटरी चार्ज करके लखनऊ लौटे सीएम योगी, अब कोरोना की चुनौती से और मजबूती से निपटेंगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार की सुबह गोरखनाथ मंदिर में पूजा-पाठ किया। सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का पालन करते हुए गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन किया। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के समाधि स्थल पर जाकर शीश नवाया, फिर मंदिर के ऊपरी हिस्से में रुद्राभिषेक करके मानव कल्याण की कामना की। इससे पहले गौशाला भी गए। गायों को चना, गुड़ खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
गोरक्षपीठाधीश्वर पहली बार मठ से दो महीने तक दूर रहे हैं। वह 22 मार्च को गोरखपुर आए थे। अब 22 मई को आए हैं। सामान्य तौर 15-20 दिन में वह गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा-पाठ करते थे।
मकसद सिर्फ यूपी की भलाई व लोक कल्याण
मंदिर प्रबंधन के मुताबिक मुख्यमंत्री का मकसद सिर्फ लोक कल्याण है। यूपी की 23 करोड़ की जनता की भलाई में लगे हैं। राजधर्म के लिए ही लंबे समय तक मठ से दूर रहे। हर जरूरतमंद को भोजन मिले, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की है। कोरोना संक्रमण के इलाज की बेहतर व्यवस्था है। हर जरूरतमंद के बैंक खाते में निर्धारित कैश पहुंच रहा है।
बिना रुके-थके काम कर रहे हैं सीएम योगी
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी बिना रुके, थके काम कर रहे हैं। यह कमाल आध्यात्मिक ऊर्जा का होता है। शुक्रवार की देर शाम आए तो पूजा-पाठ किया। शनिवार की सुबह भी पूजा-पाठ करके आध्यात्मिक ऊर्जा (शरीर की बैटरी) प्राप्त की। दोपहर बाद लखनऊ रवाना हो गए। आध्यात्मिक ऊर्जा से गोरक्षपीठाधीश्वर को काम करने और चुनौतियों से लड़ने की अविस्मरणीय शक्ति मिली है।