गोरखपुर में कोविड संक्रमण के कारण 18 दिनों तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे करीबी रिश्तेदार की जान नहीं बच पाने से दुखी हृदयरोग अस्पताल की संचालिका डॉ. नवनीता पटेल ने अपने अस्पताल को कोविड सेंटर में तब्दील कर दिया है। उनका जुनून हर कीमत पर कोरोना से मरीजों की जान बचाना है। डॉ. नवनीता बताती हैं कि पूर्वांचल में हृदय रोगियों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए पति डॉ. अखिलेश कुमार पटेल के साथ मिलकर फरवरी 2021 में अभिज्ञा हार्ट केयर सेंटर खोला था। अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप हो गया। इस लहर में उनकी मां के करीबी रिश्तेदार संक्रमित हो गए। एक डॉक्टर होने के कारण रिश्तेदार लगातार अनुरोध करते थे कि बीआरडी के चिकित्सकों से सिफारिश करें।
#LadengeCoronaSe: कोरोना से रिश्तेदार की मौत से दुखी हुआ चिकित्सक, हृदयरोग अस्पताल को बनाया कोविड सेंटर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रिश्तेदार बीआरडी में 18 दिनों तक भर्ती रहे। कोविड प्रोटोकॉल की वजह से कोई उनसे मिल भी नहीं सका। उनकी मृत्यु हो गई और अंतिम संस्कार के समय उन्हें ठीक से परिजन देख भी न सके। इससे दुखी होकर उन्होंने अपने अस्पताल में 40 बेड का कोविड वार्ड बना दिया।
जुटाया आधारभूत ढांचा, स्टाफ भी
डॉ. नवनीता पटेल कहती हैं कि हृदयरोग अस्पताल को कोविड अस्पताल में तब्दील करने के लिए चार वेंटिलेटर, आठ बाईपैप, ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था की गई। चालीस बेड के अस्पताल में कोविड मरीजों की चौबीस घंटे देखभाल के लिए एमडी चिकित्सक रखे। तजुर्बेकार पैरामेडिकल स्टाफ रखा गया। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था तैयार की गई। जब कोरोना संक्रमण चरम पर था और ऑक्सीजन की कमी थी, उस समय कोविड अस्पताल चालू करना चुनौती थी। ऐसी चुनौती के बीच एक मई को अस्पताल शुरू किया गया।
स्वस्थ हुए मरीजों की फीडबैक देती है खुशी
डॉ. नवनीता बताती हैं कि उनके अस्पताल में अधिकतर मरीज लेवल दो यानी जिनके फेफड़ों में संक्रमण का स्तर चालीस फीसदी से अधिक और लेवल तीन जिनके फेफड़ों में संक्रमण अस्सी फीसदी से अधिक था, उन्हें भर्ती किया गया। खास बात यह रही कि इनमें से अधिकतर मरीज परिचित परिवार, शहर के संभ्रांत परिवारों से थे। लेवल थ्री के नौ मरीजों को नहीं बचाया जा सका। इनके अलावा सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर गए। उनका फीडबैक संतुष्टि प्रदान करता है।
चिकित्सकों को धन्यवाद देकर बढ़ाएं मनोबल
डॉ. पटेल कहती हैं कि चिकित्सक उन मरीजों का इलाज करते हैं, जिनसे उनके परिजन संक्रमण के कारण दूर रहते हैं। संक्रमित होने के डर के बावजूद चिकित्सक इस भावना से काम करते हैं कि जान बचानी है। इन सबके बावजूद कुछ लोग चिकित्सकों पर आक्षेप लगाते हैं तो दुख होता है। ठीक होने पर कम से कम चिकित्सकों को धन्यवाद बोल दिया करें, जिससे उनका मनोबल बढ़े। अस्पताल के चिकित्सक व कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रहे इसलिए खुद पीपीई किट पहनकर कोविड वार्ड में जाती हूं। मरीजों से बात करके सकारात्मक रहने का मंत्र देती हूं।