खिचड़ी चढ़ाने की आनुष्ठानिक प्रक्रिया संपन्न करने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में मकर संक्रांति से लगे खिचड़ी मेले का लुत्फ उठाया। खिचड़ी चढ़ाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
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Gorakhnath
- फोटो : अमर उजाला।
वहां पहले से ही दूर-दराज से आए श्रद्धालु लाइन लगाकर खड़े थे। जैसे ही कपाट खुला बाबा गोरखनाथ, हर-हर महादेव, मां गंगा और गो-माता के जयघोष से समूचा मंदिर परिसर गूंज उठा।
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उसके बाद शुरू हुआ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला जो देर रात तक चलता रहा। बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं ने परिसर में स्थित सभी मंदिरों में जाकर वहां भी खिचड़ी चढ़ाई एवं पूजा अर्चना कर मंगल कामना की।
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बुढ़वा मंगलवार पर पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल के हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की खिचड़ी बाबा गोरखनाथ को चढ़ाई। मंदिर के प्रधान पुजारी कमलनाथ ने बताया कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश मकर संक्रांति के दिन बाबा के दरबार में खिचड़ी नहीं चढ़ा पाते, वह बुढ़वा मंदिर के दिन खिचड़ी चढ़ाते हैं। बुढ़वा मंदिर के दिन भी खिचड़ी चढ़ाने में उतना ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जितना कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी चढ़ाने में।
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श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से संस्कृत विद्यालय के छात्रों सहित स्वयंसेवकों की तैनाती भी की गई थी। जो पूरे मनोयोग से भीड़ को नियंत्रित करने में लगे रहे।