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खत्म नहीं हुआ है ब्लैक फंगस: लापरवाही पर आंखों की रोशनी जाने का खतरा, डॉक्टरों ने बताई ये वजह

Wed, 09 Feb 2022 02:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 09 Feb 2022 02:08 PM IST
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Black fungus danger of loss of eyesight due to negligence
ब्लैक फंगस - फोटो : पीटीआई

संक्रमित मरीजों को अगर आंखों में दिक्कत हो रही है तो वे इलाज के लिए तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें वरना, उनकी आंखें खराब हो सकती हैं। खास तौर पर ब्लैक फंगस के मरीजों को सबसे ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।  



किसी लापरवाही पर ब्लैक फंगस के शिकार मरीजों की आंखों की रोशनी जाने तक का खतरा है। ऐसे मरीजों को डॉक्टरों की सलाह है कि संक्रमण से बचें और समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें। अगर लापरवाही हुई तो रोशनी जा सकती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दूसरी लहर के बाद 100 से अधिक मरीजों का ब्लैक फंगस का ऑपरेशन हुआ था।

 

Black fungus danger of loss of eyesight due to negligence
भारत में कोरोना के मामले - फोटो : पीटीआई

जानकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस की वजह से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, संक्रमण से मुक्ति के बाद भी लोगों में इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।

 

Black fungus danger of loss of eyesight due to negligence
ब्लैक फंगस। - फोटो : अमर उजाला।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पहली और दूसरी लहर के दौरान खराब फॉलोअप की वजह से कुछ मरीजों की आंखों की रोशनी कम हुई है। लेकिन, राहत इतनी है कि ऐसे लोग दोबारा सही समय पर इलाज के लिए पहुंच गए।

 

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Black fungus danger of loss of eyesight due to negligence
ब्लैक फंगस - फोटो : पीटीआई

बताया कि एज रिलेटेड मैकुलर डिजनरेशन (एएमडी) से पीड़ित मरीजों में यह दिक्कत देखने को मिली है। पिछले तीन से चार महीनों में नियमित रूप से आंखों की जांच के लिए आने वाले मरीजों में कमी आई है। ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों को संक्रमण से ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, अगर वे संक्रमण के शिकार हुए तो आंखों की रोशनी पर ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ेगा।  

 

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Black fungus danger of loss of eyesight due to negligence
ब्लैक फंगस (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि संक्रमित मरीजों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अगर आंखों की दिक्कत हो तो सही समय पर इलाज के लिए पहुंचे। वरना, आंखों की सेहत खराब होती जाएगी। मैकुलर डिजनरेशन या डायबिटिक मैकुलर एडिमा से पीड़ित मरीजों को इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसे मरीज तत्काल जांच के लिए पहुंचें। ब्लैक फंगस के मरीजों को तीसरी लहर में संक्रमण से बचने की जरूरत है।
 

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