संक्रमित मरीजों को अगर आंखों में दिक्कत हो रही है तो वे इलाज के लिए तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें वरना, उनकी आंखें खराब हो सकती हैं। खास तौर पर ब्लैक फंगस के मरीजों को सबसे ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।
खत्म नहीं हुआ है ब्लैक फंगस: लापरवाही पर आंखों की रोशनी जाने का खतरा, डॉक्टरों ने बताई ये वजह
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जानकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस की वजह से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, संक्रमण से मुक्ति के बाद भी लोगों में इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पहली और दूसरी लहर के दौरान खराब फॉलोअप की वजह से कुछ मरीजों की आंखों की रोशनी कम हुई है। लेकिन, राहत इतनी है कि ऐसे लोग दोबारा सही समय पर इलाज के लिए पहुंच गए।
बताया कि एज रिलेटेड मैकुलर डिजनरेशन (एएमडी) से पीड़ित मरीजों में यह दिक्कत देखने को मिली है। पिछले तीन से चार महीनों में नियमित रूप से आंखों की जांच के लिए आने वाले मरीजों में कमी आई है। ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों को संक्रमण से ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, अगर वे संक्रमण के शिकार हुए तो आंखों की रोशनी पर ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ेगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि संक्रमित मरीजों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अगर आंखों की दिक्कत हो तो सही समय पर इलाज के लिए पहुंचे। वरना, आंखों की सेहत खराब होती जाएगी। मैकुलर डिजनरेशन या डायबिटिक मैकुलर एडिमा से पीड़ित मरीजों को इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसे मरीज तत्काल जांच के लिए पहुंचें। ब्लैक फंगस के मरीजों को तीसरी लहर में संक्रमण से बचने की जरूरत है।