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खतरे में जान: गोरखपुर में इधर-उधर खुले में फेंक दिया जाता है बॉयोमेडिकल वेस्ट, कई बीमारियों को दावत दे रही ये लापरवाही

Fri, 28 May 2021 12:32 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 28 May 2021 12:32 PM IST
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Biomedical waste thrown in Public place from hospital at Gorakhpur
मेडिकल वेस्ट। - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना महामारी के बीच गोरखपुर शहर में कई हॉस्पिटल और नर्सिंग होम संचालक बॉयोमेडिकल वेस्ट इधर-उधर फेंक रहे हैं। ऐसे में महामारी के बीच अन्य बीमारियों का खतरा पनपने लगा है। जबकि प्रतिदिन शहर से साढ़े तीन टन के आसपास बॉयोमेडिकल वेस्ट निकलता है। लेकिन इसके निस्तारण को लेकर न तो प्रशासन गंभीर है और न ही हॉस्पिटल और नर्सिंम होम संचालक। बॉयोमेडिकल वेस्ट उठाने के लिए बकायदे एक निजी फर्म को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। निजी फर्म 21 गाड़ियों से 621 डंपिंग प्वाइंट से मेडिकल वेस्ट उठाने का दावा कर रहा है। जबकि हकीकत इससे परे है।


जानकारी के मुताबिक जिले में करीब 339 नर्सिंग होम हैं। जबकि 400 के आसपास क्लीनिक। इन नर्सिंग होम, अस्पताल और क्लीनिक से प्रतिदिन साढ़े तीन टन के आसपास बॉयोमेडिकल वेस्ट निकलता है। इस बॉयोमेडिकल वेस्ट के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एमपीसीसी (मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी) को उठाने की जिम्मेदारी दी है।
Biomedical waste thrown in Public place from hospital at Gorakhpur
BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
यही फर्म बीआरडी और जिला अस्पताल समेत सीएचसी और पीएचसी से भी बॉयोमेडिकल वेस्ट का उठान करती है। लेकिन कोरोना महामारी के बीच यह व्यवस्था धराशाई होती दिख रही है। खंचाजी चौराहे के पास काफी मात्रा में बॉयोमेडिकल वेस्ट मिलने से इसके निस्तारण पर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले भी छात्र संघ चौराहे के आसपास बॉयोमेडिकल वेस्ट मिल चुका है। बताया जाता है कि वहां पर प्रतिदिन बॉयोमेडिकल वेस्ट खुले में फेंका जाता है। जिसका उठान पांच से सात दिन बाद होता है।  
Biomedical waste thrown in Public place from hospital at Gorakhpur
डॉ. खालिद अब्बासी - फोटो : अमर उजाला।
चार एकड़ जमीन मिले तो सुलझ जाए समस्या
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. खालिद अब्बासी ने बताया कि बॉयोमेडिकल वेस्ट को लेकर लगातार शिकायतें मिलती हैं। खुलेआम नाले व सार्वजनिक जगहों पर बॉयोमेडिकल वेस्ट फेंकना कई बीमारियों को दावत देने जैसा है। इसे लेकर एसोसिएशन की ओर से नगर निगम को पत्र भी लिखा गया है। नगर निगम से चार एकड़ जमीन की मांग की गई है। अगर नगर निगम जमीन उपलब्ध करा दे, तो बॉयोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की सभी प्रक्रियाएं हम लोग खुद ही पूरा कर लेंगे। इसे लेकर कई बार प्रशासन को भी पत्र लिखा गया है।
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Biomedical waste thrown in Public place from hospital at Gorakhpur
मेडिकल वेस्ट। - फोटो : अमर उजाला
एक करोड़ रुपये आएगी लागत
डॉ. खालिद अब्बासी ने बताया कि जमीन में निर्माण, मशीनों को स्थापित करने और संचालित करने की जिम्मेदारी एसोसिएशन की होगी। इसमें करीब एक करोड़ रुपये तक की लागत आएगी। 70 लाख रुपये की कचरे को विसंक्रमित करने वाली मशीन ही लगेगी। निजी अस्पताल से जुड़े संचालकों का कहना है कि फर्म की गाड़ी सप्ताह में दिन में एक बार आती है। ऐसे में अस्पताल का सैकड़ों क्विंटल संक्रमित कचरा रोजाना जैसे-तैसे निस्तारित हो रहा है।
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Biomedical waste thrown in Public place from hospital at Gorakhpur
मेडिकल वेस्ट। - फोटो : अमर उजाला।
पांच से सात दिन बाद उठाते हैं वेस्ट
डॉ. खालिद अब्बासी ने बताया कि जिस फर्म को बॉयोमेडिकल वेस्ट उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। वह बेडों के अनुसार रुपये लेता है। लेकिन इसके बाद भी उसे वेस्ट उठाने में पांच से सात दिन का समय लग जाता है। इसकी वजह यह है कि उसके पास गाड़ियों की कमी है। ऐसे में वेस्ट पड़ा रहता है। कई बार लोग उसे अस्पतालों के आसपास भी फेंक देते हैं।
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