आज हम आपको गोरखपुर की एक ऐसी कत्लेआम की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे में एक ही रात में परिवार के सात लोगों का बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। इस घटना में एक अकेली जिंदा बची थी मासूम बच्ची, जिसे हत्यारे मृत समझकर छोड़ गए थे। आगे की स्लाइड्स देखें तस्वीरें...
गोरखपुर के इस घर में सात लोगों को उतार दिया गया था मौत के घाट, जानिए क्या हुआ था इस 'कत्लेआम' से पहले
घटना 20 नवंबर 2001 की है। इस कत्लेआम में मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कातिलों की बर्बरता का खुलासा हुआ। पुलिस की जांच रिपोर्ट भी चौंकाने वाली थी। वारदात को अंजाम देने वालों में उन लोगों का नाम आया, जिनको भोजन खिलाकर पेट भरा था।
लगभग 19 साल पहले गोरखपुर के रूस्तमपुर के शिवाजी नगर कॉलोनी में बैंककर्मी राकेश राय के परिवार के सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। बेरहमी ऐसी की देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। तीन मासूम बच्चों को दीवाल पर पटक-पटक कर मारा गया था। अगली सुबह जब छठ पर्व को लोग घरों से निकले और राकेश राय के घर कर खुला दरवाजा देखकर जो भी अंदर गया उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पड़ोसी अमित सिंह बताते हैं कि यकीन मानिए बच्चों की लाश देखकर गश आ गया था। बस एक ही सवाल था, कौन हो सकता है, इतना बड़ा दरिंदा ?
इन सब के बीच एक कोने पर राकेश की बेटी पड़ी थी। सिर से खून बह रहा था, सांसे उखड़ी-उखड़ी चल रही थी। किसी की हिम्मत नहीं थी कि वह उसके पास तक जा सके। पुलिस मौके पर पहुंचकर उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया। सिर पर चोट आने की वजह से होश आने में भी लंबा समय लग गया था। कई महीनों तक वह सदमे में रही।
मौत को खुद बुलाया था
पुलिस की जांच में तब सामने आया था कि बदमाश वारदात के लिए जगह चिह्नित करने दोपहर में राकेश के घर भीख मांगने के बहाने गए थे। भूखा समझकर उनकी पत्नी ने घर में दो लोगों को बुलाकर भर पेट भोजन कराया था तब उन्हें भी नहीं बता था कि जिसे वह निवाला दे रही हैं वहीं रात में उन्हें और परिवार को मौत के घाट उतार देगा।