अमर उजाला मोहल्ला डायरी: गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर हुआ था गोरखनाथ मोहल्ले का नामकरण
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उस वक्त यह क्षेत्र घने जंगलों से भरा हुआ था। राप्ती नदी उस समय वर्तमान गोरखनाथ मंदिर के उत्तर से बहती थी। गोरखनाथ जी को यह स्थान पसंद आया और उन्होंने इसे अपने तपस्थली बना ली। उनके तप और तेज के प्रभाव से इस नगर को उनके नाम से जाना जाने लगा।
उनके नाम की प्रसिद्धि से पहले इसे राम ग्राम और पिप्पलीवन नाम से जाना जाता था। लोक विश्वास है कि मंदिर परिषद में जो अखंड धूनी जलती रहती है उनके वक्त की है। उस धूनी के सटे दक्षिण में पहले एक साधारण सा मंदिर होता था। उसी स्थान पर बाद में वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।
गोरखनाथ मोहल्लों में मुगलों के शासन काल में मुस्लिम आबादी का अधिवास हुआ। मंदिर के प्रायः हर तरफ सघन मुस्लिम आबादी है। रसूलपुर और दशहरी बाग तो उन्हीं से आबाद है। इन मोहल्लों में पहले करघा यानी हैंडलूम का बड़ा कारोबार होता था, जो अब कमजोर पड़ गया है।