लड़ाई के समय बंदूक और गोला बारूद के अलावा दो और चीजें अहम मानी जाती हैं वह पानी और रसद (राशन)। चार फरवरी 1922 को सत्याग्रहियों ने जब चौरीचौरा थाना फूंक दिया तो अंग्रेजों ने इन जरूरतों को समझा। यही वजह रही कि जब 1924 में फिर से चौरीचौरा थाने का निर्माण किया गया तो उसके भीतर कुआं भी बनवाया गया। ऊपर की तरफ रसद रखने के लिए एक कमरे का निर्माण कराया गया। कुआं और रसद रखने की जगह आज भी चौरीचौरा थाने में मौजूद है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
चौरीचौरा की ये कहानी नहीं जानते होंगे आप, घटना के बाद सबसे पहले अंग्रेजों ने किया था ये काम
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चौरीचौरा मामले में 53 लोगों ने जान गंवाई थी। इसमें पुलिस की गोली से जान गंवाने वाले सत्याग्रही तो शहीद माने जाते हैं मगर गुस्से का शिकार बने पुलिसवाले भी शहीद माने जाते हैं। बता दें कि, 4 फरवरी 1922 को चौरीचौरा के भोपा बाजार में एकत्रित सत्याग्रहियों में से एक की गांधी टोपी को सिपाही ने पांव से रौंद दिया था।
इसी पर सत्याग्रही आक्रोशित हो उठे और पुलिस वालों को दौड़ा लिया। पुलिस भी भागकर थाने में छिप गई। इसके बाद थाने को सत्याग्रहियों ने घेर लिया तो पुलिस ने फायरिंग कर दी। जिसमें तीन सत्याग्रही मौके पर शहीद हो गए, जबकि 50 से ज्यादा घायल हो गए। गुस्साए क्रांतिकारियों ने पुलिस चौकी को आग लगाकर दारोगा समेत 23 पुलिसकर्मियों को जला दिया था। इस मामले में 19 लोगों को फांसी की सजा हुई थी।
शहीदों की याद में चौरीचौरा स्मारक बना तो वहीं इस घटना में जो भारतीय पुलिस वाले मरे, उनकी याद में थाना परिसर में स्मारक बनाया गया है। थाने में तैनात पुलिस वाले रोजाना सुबह इस स्मारक पर जाकर उन्हें नमन करते हैं। इस स्मारक पर जयहिंद भी लिखा है। सत्याग्रहियों पर गोली चलाने वाले पुलिस वालों का स्मारक होने पर शहीदों के परिजनों समेत तमाम लोगों में आक्रोश है। वे इसे लंबे समय से हटाने की मांग करते आ रहे हैं। वहीं, पुलिस वालों और कुछ अन्य लोगों का मानना है कि घटना में जिन पुलिस वालों की जान गई वे भी भारतीय थे और ड्यूटी पर थे।
इन पुलिसवालों की हुई मौत
थानेदार गुप्तेश्वर सिंह, उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस बल पृथ्वी पाल सिंह, हेड कांस्टेबल वशीर खां, कपिलदेव सिंह, लखई सिंह, रघुवीर सिंह, विषेशर राम यादव, मोहम्मद अली, हसन खां, गदाबख्श खां, जमा खां, मगरू चौबे, रामबली पांडेय, कपिल देव, इंद्रासन सिंह, रामलखन सिंह, मर्दाना खां, जगदेव सिंह, जगई सिंह और उस दिन वेतन लेने थाने आए चौकीदार बजीर, घिंसई, जथई व कतवारू राम की मौत हुई थी।