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फांसी से पहले भावुक हो गए थे क्रांतिकारी 'बिस्मिल', मां ने कहा था 'मैं तो समझती थी कि मेरा बेटा बहादुर है'

Tue, 26 Jan 2021 07:28 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 26 Jan 2021 07:28 AM IST
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26 january 2021 special story on Freedom fighter Ramprasad bismil
गोरखपुर जेल में इस कोठरी को बिस्मिल कक्ष के नाम से संरक्षित किया गया है। - फोटो : अमर उजाला

पूरे देश में आज बड़े ही धूमधाम से 72वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर हम आपको काकोरी कांड के महानायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल खास कहानी बताने जा रहे हैं। गोरखपुर में बिस्मिल की एक अलग पहचान है। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी चार महीने और दस दिन यहां जिला जेल में बिताए थे। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...


 

26 january 2021 special story on Freedom fighter Ramprasad bismil
gorakhpur jail - फोटो : अमर उजाला।

चौरीचौरा कांड के बाद कांग्रेस ने अचानक असहयोग आंदोलन वापस ले लिया गया। इसके कारण बिस्मिल का इनसे मोहभंग हो गया था। इसके बाद उन्होंने चंद्रशेखर 'आजाद' के नेतृत्व वाले हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के साथ गोरों के सशस्त्र प्रतिरोध का नया दौर आरंभ किया लेकिन सवाल था कि इस प्रतिरोध के लिए शस्त्र खरीदने को धन कहां से आए?

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इस जेल में दी गई थी राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी - फोटो : अमर उजाला

इसी का जवाब देते हुए उन्होंने नौ अगस्त, 1925 को अपने साथियों के साथ एक ऑपरेशन में काकोरी में ट्रेन से ले जाया जा रहा सरकारी खजाना लूटा तो थोड़े ही दिनों बाद 26 सितंबर, 1925 को पकड़ लिए गए और लखनऊ की सेंट्रल जेल की 11 नंबर की बैरक में रखे गए। मुकदमे के नाटक के बाद अशफाक उल्लाह खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रौशन सिंह के साथ उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई।



 

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26 january 2021 special story on Freedom fighter Ramprasad bismil
राम प्रसाद बिस्मिल अंतिम दिनों में इसी जगह पर बंदी रहे। - फोटो : अमर उजाला

मौत के डर से नहीं मां, तुमसे बिछड़ने के शोक में आए हैं आंसू
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की माता मूलरानी ऐसी वीरमाता थीं जिनसे वे हमेशा प्रेरणा लेते थे। शहादत से पहले वह रामप्रसाद बिस्मिल से मिलने गोरखपुर जेल पहुंचीं तो पंडित बिस्मिल की आंखें डबडबाई गईं और वह मां से लिपटकर भावुक हो गए। मां ने कलेजे पर पत्थर रख लिया और उलाहना देती हुई बोलीं, 'अरे, मैं तो समझती थी कि मेरा बेटा बहुत बहादुर है और उसके नाम से अंग्रेज सरकार भी थरथराती है। मुझे पता नहीं था कि वह मौत से इतना डरता है

 

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26 january 2021 special story on Freedom fighter Ramprasad bismil
इस कोठरी को बिस्मिल कक्ष के नाम से संरक्षित किया गया है। - फोटो : अमर उजाला

उनसे पूछने लगीं, 'तुझे ऐसे रोकर ही फांसी पर चढ़ना था तो तूने क्रांति की राह चुनी ही क्यों? तब तो तुझे इस रास्ते पर कदम ही नहीं रखना चाहिए था।' इसके बाद 'बिस्मिल' ने अपनी आंखें पोंछ डालीं और कहा था कि यह आंसू मौत के डर से नहीं, तुमसे बिछड़ने के शोक में आए हैं।

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