विश्व पुस्तक मेले के आखिरी पड़ाव में पुस्तकों पर भारी छूट का पाठकों ने जमकर फायदा उठाया। दूसरे वीकेंड पर शनिवार को पुस्तक प्रेमियों की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ी। बाल पाठकों के साथ उनके दादा-दादी और नाना नानी भी मेले में दिखाई दिए। वह अपनी पसंदीदा किताबों की चाह में यहां पहुंचे थे। वहीं, आज यहां लोगों की भारी भीड़ मेले में उमड़ सकती है।
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book fair
- फोटो : kumar sanjay
प्रगति मैदान में छह जनवरी से शुरू मेले का शनिवार को आठवां दिन रहा। सप्ताह का अंत होने की वजह से कामकाजी लोगों की भीड़ यहां दिखाई दी। बाल मंडप के साथ ही नन्हें पाठक अन्य मंडपों में भी पसंदीदा किताबें तलाशते नजर आएं। हरियाणा से आए 65 वर्षीय बुजुर्ग सतीश चौधरी ने बताया कि वह पूरे परिवार के साथ यहां आए हैं। आठ वर्षीय पोती श्रेया के साथ वह भी पुस्तक मेले में कहानियों की किताबें तलाश रहे हैं।
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पुस्तकों की दुनिया में आकर उन्हें अपने पुराने दिन याद आ गए, जब पूरी दुनिया ही किताबों में समाई दिखती थी, लेकिन अब इंटरनेट ने किताबों की विश्वसनीयता को कम कर दिया है। पंचतंत्र की कहानियां तलाशती 59 वर्षीय बुजुर्ग महिला संतोष शर्मा ने बताया कि वह दो नातियों को पुस्तक मेले में लेकर आई हैं। चूंकि उनकी बेटी और दामाद कामकाजी हैं, इसलिए वह नातियों को किताबों से मिलने वाले ज्ञान के बारे में हमेशा बताती हैं। उन्होंने कहा कि आदर्श जीवन के पीछे किताबों में छपी छोटी छोटी नैतिक मूल्यों की कहानियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। वह खुद बच्चों के साथ मिलकर कहानियों की किताबें पढ़ती हैं।
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‘बॉम्बे बार’ का लोकार्पण
राजकमल प्रकाशन में विवेक अग्रवाल की पुस्तक ‘बॉम्बे बार’ का लोकार्पण हुआ। लेखक ने बार बालाओं की जिंदगी को वास्तविक ढंग से समाज के समक्ष रखने की कोशिश की है। इसका लोकार्पण सत्यनारायण जटिया और अशोक माहेश्वरी ने किया। विवेक अग्रवाल ने कहा कि बार बालाओं के जीवन की कुछ कठोर व मर्म भेदी सच्चाईयां हैं, जो कोई नहीं जानता। बारबालाएं क्या करती हैं? कितने दिन इस रुपहले संसार में अंधियारा जीवन जीती हैं? वे कहां गुम हो जाती हैं? कैसा इंसान उनके अंदर बसता है? इन्हें कैसा पति, पिता, दोस्त, परिवार मिलता है? ऐसी हर जानकारी इस किताब में प्रस्तुत की गई है।