विकास दुबे शुक्रवार सुबह उज्जैन से यूपी ले जाते वक्त एनकाउंटर में मारा गया। जिस गाड़ी में उसे पुलिस यूपी ले जा रही थी, वह कार अचानक पलट गई जिसके बाद विकास दुबे एक जवान की पिस्तौल छीनकर भागने लगा। वह काफी दूर तक भागा और पुलिस वाले भी लगातार उसका पीछा करते रहे। इस बीच पुलिसवाले उसे आत्मसमर्पण करने के लिए भी कहते रहे, लेकिन वह नहीं माना और पुलिसवालों पर भी गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और आत्मरक्षा के लिए गोलियां चलाईं, जिसमें उसकी मौत हो गई।
Vikas Dubey News: महाकाल मंदिर में बहुत रोया था विकास दुबे, जानें किस बात पर कहा- पुलिस ने मुझे मजबूर किया
मंदिर में बहुत रोया था विकास दुबे
विकास दुबे गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार हुआ था। उसे मंदिर में पहली बार सुबह करीब 7.00 बजे देखा गया था। जिसके बाद करीब दो घंटे बाद वह गिरफ्तार हुआ। विकास दुबे ने बताया कि इन दो घंटों के बीच वह महाकाल के मंदिर में बैठकर बहुत रोया था। कानपुर एनकाउंटर में जिस तरह से उसने पुलिसवालों को मारा वो सोचकर वह बहुत रोया।
विकास ने पुलिस को ये भी बताया था कि उसे अपने किए पर अफसोस है। उसने यह भी कहा कि, 'मुझे अपने किए पर अफसोस है, मुझे गोली चलाने के लिए मजबूर किया गया।' ऐसी ही बात विकास के करीबी प्रभात मिश्रा ने भी कही थी। प्रभात भी विकास की तरह ही फरीदाबाद से यूपी ले जाते वक्त एनकाउंटर में मारा गया। प्रभात ने ये बताया था कि उसे पुलिसवालों को मारने का अफसोस था।
विकास ने बताया कि उसने और साथियों ने मिलकर आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा।
शव जलाने के लिए पचास गैलन मिट्टी के तेल का भी इंतजाम पहले से किया गया था। विकास ने बताया कि गली के दोनों तरफ छत पर गुंडों को तैनात किया गया था। सभी असलहों से लैस थे। पुलिस के पहुंचते ही गोलियां बरसाईं गईं। पुलिसकर्मियों को घेरकर मारा जिससे किसी के बचने की कोई उम्मीद न रहे। विकास बोला कि चौबेपुर के पूर्व थानेदार विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा के अलावा अन्य कई पुलिसकर्मियों ने उसको दबिश की सूचना दी। चौबेपुर, शिवराजपुर, बिल्हौर और ककवन थाने की पुलिस उससे सेट थी। ऐसे में अब पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण पर सवाल उठने लगे हैं।