उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर दिल्ली की अदालत में गिड़गिड़ाता हुआ नजर आया। सेंगर ने गुरुवार को तीस हजारी कोर्ट में कहा कि अगर उसने कुछ गलत किया है तो उसकी आंखों पर एसिड फेंक दिया जाए और उसे फांसी के फंदे पर लटका देना चाहिए। आगे जानिए कुलदीप सेंगर ने अदालत में क्या-क्या कहा...
सजा पर जिरह दौरान उन्नाव से विधायक सेंगर ने विशेष जज धर्मेश शर्मा के समक्ष दावा किया कि पीड़िता की मौत में उसकी कोई भूमिका नहीं है। सेंगर ने कहा, ‘या तो मुझे न्याय दीजिए या फांसी पर लटका दीजिए। अगर मैंने कुछ गलत किया है तो मेरी आंखों पर तेजाब डाल दिया जाए।
वह आगे बोला, 'मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मेरी दो बेटियां हैं और मुझे छोड़ दिया जाए।’ इस पर जज शर्मा ने कहा, ‘आपका परिवार है। हर किसी का है। आपको यह सब अपराध करते समय सोचना चाहिए था, लेकिन आपने सभी कानूनों को तोड़ा। अब आप हर चीज को ना कहेंगे? आपको पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और आप अपनी संलिप्तता से इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि रिकॉर्ड से साफ पता चलता है कि जब पीड़िता के पिता की हिरासत में पिटाई हो रही थी तो पुलिस अधिकारियों से फोन पर आपकी बातचीत हो रही थी।’
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कुलदीप सेंगर
- फोटो : अमर उजाला
सेंगर को दुष्कर्म के मामले में पहले ही आजीवन कारावास हो चुकी है। नाबालिग पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल, 2018 को पुलिस स्टेशन में हुई मौत के मामले में सेंगर को गैर इरादतन हत्या का दोषी भी ठहराया गया है। सेंगर के भाई और दो पुलिस कर्मियों समेत छह लोग भी इसी मामले में दोषी ठहराए जाने के साथ दस साल की सजा हो गई है।
सीबीआई ने सेंगर एवं अन्य के लिए अधिकतम सजा की मांग की है, जिसमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सीबीआई के वकील ने कहा कि नौकरशाह होने के नाते इन दो पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य था कि कानून व्यवस्था बनाए रखें, लेकिन उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं की और पीड़िता के पिता का समय पर इलाज नहीं कराया।