ट्विन टावर के निर्माण के दौरान नोएडा प्राधिकरण के 24 अधिकारियों, चार बिल्डरों और दो वास्तुविदों पर आरोप लगे थे। मामले की एसआईटी जांच कराई गई थी। जिनके बाद एफआईआर दर्ज कराई र्गई थी। लेकिन मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल उठ रहे कि ट्विन टावर तो गिर रहा लेकिन इन पर कार्रवाई कब होगी। मीडिया में सवाल उछलते ही लखनऊ से लेकर नोएडा तक घंटी घनघनाने लगी है। नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में उस फाइल को ढूंढा जाने लगा, जो कि एफआईआर दर्ज होने के बाद बनाई गई थी। बताया गया कि शासन ने प्राधिकरण से फाइल मांगी है। इसके अलावा एफआईआर की कॉपी भी मांगी गई है। इसमें उन सभी आरोपियों के नामों का जिक्र है। संभव है कि सरकार की ओर से इन पर कोई ठोस कार्रवाई की जाए।
ये हैं Twin Towers के 30 आरोपी: पढ़ें उनके नाम और पद, टावरों के ध्वस्त होने के बाद ढूंढी जाने लगी इनकी भी फाइल
इस बाबत एमराल्ड कोर्ट के बाहर सीईओ रितु माहेश्वरी से भी सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के क्रम में सरकार ने एसआईटी गठित की है। 24 से अधिकारियों और अन्य पर लगे आरोप की जांच की गई। सबके खिलाफ एफआईआर हुई।
इसके बाद सारकर की ओर से कड़ा एक्शन लिया गया है। सरकार की ओर से कड़ा संदेश भी दिया गया। प्राधिकरण की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि सभी काम लोगों के लाभ के लिए होगा। अगर किसी तरह के नियम टूटते हैं तो इसकी जवाबदेही तय होगी। सरकार के नियमों का पालन करना होगा।
इन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
- एके मिश्रा, नगर नियोजक
- राजपाल कौशिक, सेवानिवृत्त, वरिष्ठ नगर नियोजक
- त्रिभुवन सिंह, सेवानिवृत्त, मुख्य वास्तु विधि नियोजक
- शैलेंद्र कैरे, सेवानिवृत्त, उपमहाप्रबंधक, ग्रुप हाउसिंग
- बाबूराम, सेवानिवृत्त, परियोजना अभियंता