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दिल्ली हाईकोर्ट: गौरव भाटिया की मानहानि याचिका पर सुनवाई, सीजेपी नेताओं की पोस्ट पर अदालत ने क्या कहा?

Thu, 10 Sep 2026 12:41 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 10 Sep 2026 12:41 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा नेता गौरव भाटिया के खिलाफ बिना सत्यापन सोशल मीडिया पोस्ट करने पर सीजेपी नेताओं को अदालत ने पोस्ट हटाने का सुझाव दिया। भाटिया ने आरोप लगाया कि एआई से तैयार पोस्ट में उनके नाम से झूठे बयान प्रसारित किए गए।
 

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Hearing in Delhi High Court on Gaurav Bhatia defamation plea against CJP
गौरव भाटिया और सौरभ दास (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया के बारे में बिना सत्यापन पोस्ट करने को सही नहीं बताया। अदालत ने दोनों को सुझाव दिया कि वे अपनी ओर से संबंधित पोस्ट हटा लें।

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अदालत सीजेपी के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ गौरव भाटिया की ओर से दायर मानहानि मामले की सुनवाई कर रही थी। भाटिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पांच सितंबर को दास और रांका की ओर से किए गए पोस्ट पर आपत्ति जताई है। यह पोस्ट स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद किया गया था। भारद्वाज पर सीजेपी के एक किशोर प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करने का आरोप है।
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याचिका के अनुसार, संबंधित पोस्ट एआई से तैयार किया गया ट्वीट है। इसमें कथित तौर पर गौरव भाटिया के नाम से झूठे तौर पर यह कहा गया कि उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज को 'दिमागी नक्सली' और 'जातिवादी' बताया था।
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भाटिया ने अपनी याचिका में कहा है कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केवल उनके किसी वास्तविक बयान की आलोचना, टिप्पणी या उससे असहमति जाहिर नहीं की, बल्कि कथित तौर पर जनता के सामने गलत तरीके से यह प्रस्तुत किया कि उन्होंने ऐसे बयान दिए थे, जो वास्तव में उन्होंने कभी दिए ही नहीं थे।

सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने मौखिक रूप से कहा कि अभिजीत दिपके के खिलाफ कुछ भी आरोपित नहीं किया गया है। इस पर दिपके के वकील अधिवक्ता नकुल गांधी ने उनका नाम मामले में पक्षकारों की सूची से हटाने का अनुरोध किया।


इस बीच, सौरव दास की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित ट्वीट पहले ही हटा दिया गया है। इस पर अदालत ने मौखिक रूप से कहा, 'लेकिन आपने कुछ और भी पोस्ट किया है। आपको अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन कभी-कभी बात को अधिक स्पष्ट और बेहतर तरीके से रखना जरूरी होता है, ताकि उसका उद्देश्य सही तरीके से सामने आए। हम इसे समझते हैं, क्योंकि हम भी उस उम्र से गुजर चुके हैं।' अदालत ने गौरव भाटिया से यह भी कहा कि इस मुद्दे को संभालने के दूसरे तरीके थे। अदालत ने कहा कि वह मामले को अदालत में लाने के बजाय प्रतिवादियों से सीधे बात कर सकते थे।

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