छात्र नेता बनने का ख्वाब रखने वाले लॉरेंस बिश्नोई की चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज छात्र संघ चुनाव में हार ने उसे छात्र नेता से गैंगस्टरों का नेता बना दिया। सिद्धू मूसावाला की हत्या के बाद उसकी गिनती देश के बड़े गैंगस्टरों में होने लगी है। उस पर मूसावाला की हत्या करवाने का आरोप है और तिहाड़ जेल में स्पेशल सेल उससे पूछताछ भी कर रही है। उसने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड गैंगस्टरों का एक सिंडिकेट तैयार कर लिया है और जेल से ही पूरे सिंडिकेट को चला रहा है। उसके पास इन राज्यों में सात सौ शूटर सक्रिय हैं, जो उसके एक आदेश पर उगाही करने, सुपारी लेकर हत्या करने और विरोधी गैंग के सदस्यों को ठिकाने लगाने का काम कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई ने स्कूल की पढ़ाई पंजाब के फज्जिलका में की है। वह फज्जिलका का रहने वाला है और उसके पिता पंजाब पुलिस में कार्यरत थे।
स्कूल की पढ़ाई के बाद वह कॉलेज की पढ़ाई करने चंडीगढ़ आ गया। यहां डीएवी कॉलेज में उसका दाखिला हुआ। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुए झगड़े ने उसे जुर्म की दुनिया में धकेल दिया। बचपन से ही उसमें एक जिद थी, जिस बात को वह ठान लेता था। उसे किसी भी हालत में पूरा करता था।
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Lawrence Bishnoi-Sidhu Moose Wala
- फोटो : Social Media
दोस्तों ने उसे कॉलेज यूनियन का चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। राजनीति में आने से पहले ही उसने अपने आप को तैयार किया और उसने छात्रों का एक ग्रुप बनाया। जिसाक नाम स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी रखा। संगठन बनाने के बाद उसने छात्रों को जोड़ा और फिर कॉलेज में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। लेकिन वह चुनाव हार गया।
लॉरेंस हार को बर्दाश्त नहीं कर पाया और गुस्से में एक पिस्टल खरीद ली। हथियार आने के बाद फिर वह गुनाह से दूर नहीं रह सका। लॉरेंस बिश्नोई का सामना एक दिन विरोधी उदय गुट से हुआ और वह गुस्से में गोली चला दी।
वर्ष 2011 में लॉरेंस के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया गया। पुलिस से बचने और दूसरे गुट को सबक सिखाने के लिए उसने गैंगस्टर से हाथ मिला लिया। यहीं से उसने अपराध में कदम रख लिया।