दिल्ली में यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, कई इलाकों में पानी भर चुका है। हथिनीकुंड बैराज से रविवार को छोड़े गए पानी के कारण दिल्ली में चार दशक की सबसे बड़ी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों के साथ बैठक कर यमुना के किनारे बसे 24 हजार लोगों को हटाने के निर्देश दिए हैं।
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एनडीआरएफ की टीम बाढ़ में रेस्क्यू करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने उनके लिए 2100 से ज्यादा अस्थायी टेंट बनाए हैं। पुराने लोहे के पुल को वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि दिल्ली में बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा मंगलवार रात से लेकर बुधवार सुबह तक है। इसे लेकर सभी जिम्मेदार महकमे अलर्ट पर हैं।
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बाढ़ से परेशान लोग
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सरकार को चिंता इस बात को लेकर है कि रविवार को हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया करीब 21 लाख क्यूसेक पानी 72 घंटे में दिल्ली पहुंच जाएगा। इससे निचले क्षेत्र में तो पानी भरेगा ही, उत्तरी और पूर्वी दिल्ली के भी कई इलाकों में पानी भरने की आशंका है।
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बाढ़ में लोगों के साथ जानवर भी परेशान
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कुल 30 स्थानों पर बोट की तैनाती की गई है। यमुना का पानी जिस तरह बढ़ रहा है, उससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होंगे। सरकारी आंकड़े बताते है कि यमुना खादर में करीब 23,816 लोग रहते हैं। वे झुग्गी खाली नहीं करेंगे तो कभी भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इन लोगों के लिए 2120 अस्थायी टेंट लगाए गए हैं।
बाढ़ का पानी घर में घुसने से परेशान लोग
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बाढ़ का पानी घर में घुसने से परेशान लोग
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इसके साथ ही खाने, पानी, शौचालय का भी इंतजाम किया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि केंद्र सरकार, दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। बेला गांव, गीता कॉलोनी ब्रिज, तिब्बत मार्केट के पीछे के इलाके के लोग अब भी अपनी झुग्गी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि इन बस्तियों के लोगों ने भी अपनी तरफ से तैयारी पूरी कर रखी है। आशंका है कि इस बार पानी का स्तर काफी ऊपर जाएगा। यमुना में इस बार गाद बहुत ज्यादा है।