नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका एक सूट विवाद में आया था। बंद गले के सूट में नरेंद्र मोदी का नाम सुनहरे रंग के धागे से लिखा था। इस सूट की कीमत को लेकर काफी विवाद हुआ था और कांग्रेस ने इसकी आलोचना करते हुए बीजेपी नीत केंद्र सरकार को 'सूट-बूट की सरकार' तक कह दिया था।
अब इस सूट के बारे में एक नया मामला सामने आया है। इस सूट की हकीकत को जानने की उत्सुकता लोगों में भी थी और कुछ दिन बाद एक आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभरवाल ने एक आरटीआई दायर करते हुए यह जानना चाहा कि 1998 से लेकर अबतक देश के प्रधानमंत्रियों के कपड़े पर कितना खर्च किया गया है। आरटीआई में जिस दौर की जानकारी मांगी गई थी उस दौरान अटल बिहारी वाजपेई और मनमोहन सिंह पीएम के पद पर कार्य कर चुके थे।
इस आरटीआई के जवाब में पीएमओ ने स्पष्ट किया है यह याचिका व्यक्तिगत है और इसे सरकार की सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। पीएमओ ने अपने जवाब में कहा है कि प्रधानमंत्री अपने कपड़ों पर खर्च की गई राशि का भुगतान खुद करते हैं। पीएम के निजी कपड़ों पर खर्च की गई राशि का भुगतान भारत की सरकार नहीं करती। यहां तक कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई और मनमोहन सिंह भी अपने कपड़ों पर खर्च की गई राशि का भुगतान खुद ही करते थे।
इस जानकारी के सार्वजनिक होने के बाद बीजेपी ने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि अब इन्हें समझ जाना चाहिए कि वह बेकार में हंगामा खड़ा करते हैं और इससे हमारे प्रधानमंत्री की छवि खराब होती है। इन सब चीजों से देश की छवि को भी नुकसान पहुंचता है।
बीजेपी नेता जीवन गुप्ता ने कहा कि यदि देश का प्रधानमंत्री अच्छे कपड़े पहनता है तो इससे देश की छवि पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि पीएम ने सिर्फ एक बार डिजाइनर सूट पहना है, जिसके बाद सूट को नीलाम कर दिया गया और इससे मिले पैसे स्वछ भारत अभियान में खर्च किया गया।