70वें गणतंत्र दिवस समारोह में भारत दुनिया को स्वतंत्रता संग्राम, गांधी, अहिंसा, सत्याग्रह, संस्कृति और इतिहास से रूबरू कराएगा। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की थीम के तहत राजपथ पर राज्य झांकियों के माध्यम से अपनी समृद्ध विरासत, पारंपरिक धरोहर के साथ-साथ बापू से जुड़े अनछुए पहलू दर्शाएंगे। हर झांकी में बापू अलग-अलग रंगों में देश और दुनिया को सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, शांति, एकता का पाठ पढ़ाते नजर आएंगे।
गणतंत्र दिवस फुल ड्रेस रिहर्सलः राजपथ पर रहेगी बापू की धूम, झाकियों में संस्कृति और इतिहास का संगम
दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में मंगलवार को रक्षा मंत्रालय की ओर से झांकियों का प्रीव्यू कराया गया। इस बार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली समेत 16 राज्यों, छह मंत्रालयों और विभागों की झांकियां शामिल होंगी। अंडमान-निकोबार की झांकी में सेल्युलर जेल यानी काले पानी की झलक दिखेगी। इसमें दिखाया जाएगा कि आजादी के दीवाने भूखे-प्यासे रहकर दुख-दर्द के बाद भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करते हुए हिंदुस्तान की आजादी का सपना लेकर जी रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की झांकी के अगले भाग में गांधी जी सत्य के साथ मेरे प्रयोग पुस्तक लिखते दिखेंगे। उनके पीछे दर्शकों को काशी विद्यापीठ की झलक दिखेगी। काशी विद्यापीठ का शिलान्यास गांधी ने ही किया था। झांकी के दोनों ओर प्राचीनतम नगरी की कर्मकांड की प्रक्रिया, गंगा की पूजा, बौद्ध भिक्षु, साधु, पंडितों के साथ सुसजिज्त मंदिर व भक्तिभाव की समरसता दिखेगी।
उत्तराखंड : भारत के स्विट्जरलैंड में दिखेंगे बापू
देवभूमि उत्तराखंड की झांकी में दर्शक भारत के स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले कौसानी को दिखाया गया है। इसमें कौसानी का अनासक्ति आश्रम मुख्य रूप से दिखेगा। महात्मा गांधी ने वर्ष 1929 में कौसानी का भ्रमण किया था। इस स्थान पर उन्होंने गीता पर आधारित अपनी प्रसिद्ध पुस्तक अनासक्ति योग की प्रस्तावना लिखी थी। झांकी के अगले भाग में दर्शकों को बापू अनासक्ति योग लिखते दिखेंगे। बीच में कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम दिखाया गया है। पहाड़ों की खूबसूरती के बीच शांति हर किसी का मन मोह लेती है। पंडित गोविंद बल्लभ पंत को महात्मा गांधी से बात करते हुए भी दिखाया जाएगा। झांकी के पीछे देवदार के वृक्ष, जागेश्वर धाम, सांस्कृतिक विरासत, बद्रीनाथ व केदारनाथ की झलक भी दिखेगी।