सफदरजंग एंकलेव के हुमायूंपुर गांव में तुगलक कालीन करीब 600 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत को लेकर विवाद पैदा हो गया है। यह इमारत दिल्ली पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आती है। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज (इंटेक) के मुताबिक, रिकॉर्ड में इस इमारत को गुंबद बताया गया है। जबकि वर्तमान में यहां शिव मंदिर है। 47 साल से इस मंदिर में शिवलिंग और अन्य भगवान की मूर्तियां स्थापित हैं। (सभी फोटो- जी पाल)
Pics: रातोंरात मकबरा नहीं बना मंदिर बल्कि 47 सालों से यहां पूजे जाते हैं शिव, जानें छिपे हुए तथ्य
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि धार्मिक मुद्दा बनाकर गांव में विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। सबसे खास बात यह है कि आजादी के बाद इस स्थल का किसी भी विभाग द्वारा सुध नहीं ली है। इंटेक दिल्ली चैप्टर के प्रोजेक्ट निदेशक अजय कुमार ने बताया कि दिल्ली पुरातत्व विभाग ने उन्हें पिछले साल 18 ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण का प्रोजेक्ट दिया था। इसमें हुमायूंपुर गांव का तुगलक कालीन मकबरा भी शामिल था।
उन्होंने बताया कि आठ महीने पहले एक टीम इमारत के संरक्षण के लिए पहुंची थी। इमारत पर ताला लगा था। अंदर फर्नीचर जैसा सामान भरा था। स्थानीय लोगों ने टीम का विरोध भी किया था। पुरातत्व विभाग को इसकी सूचना दी गई। उनकी टीम दूसरी बार वहां पहुंची। ताले की वजह से टीम को फिर वापस लौटना पड़ा। अजय कुमार के मुताबिक, 1929 में मौलवी जफर हसन द्वारा लिखी गई एक किताब में इस ऐतिहासिक स्थल को मकबरा बताया गया है।
पहली बार बनी संरक्षण की योजना
समय के साथ भुला दी गई ऐतिहासिक इमारतों में इसे भी शामिल किया गया। इस इमारत के निर्माण के बाद पहली बार पिछले साल सरकार ने संरक्षण की योजना बनाई। इसका जिम्मा इंटेक को दिया गया। संस्था के मुताबिक, इमारत पर ताला लगे होने की वजह से इसका संरक्षण नहीं किया जा सका।
केसरिया रंग से रंग दी इमारत
स्थानीय निवासी दिलीप कुमार ने बताया कि मार्च के पहले सप्ताह में लोगों ने इमारत को केसरिया और सफेद रंग से रंग दिया। यहां राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित की गई। इमारत के एक कोने में शिव परिवार और दूसरे कोने में देवी कात्यायनी व गणेश भगवान की पत्थरों की मूर्ति पहले से स्थापित है।