पाकिस्तान की सरजमीं पर जन्म लेने वाली नादिरा बेगम ने निकाह के बाद भारत को ही अपनी दुनिया बना लिया था, बावजूद इसके मरते दम तक नादिरा को भारत की नागरिकता हासिल नहीं हो सकी। मंगलवार को नादिरा बेगम का बीमारी के चलते इंतकाल हो गया। परिजनों को अफसोस है कि वह बिना भारतीय राष्ट्रीयता हासिल करे ही इस दुनिया से रुखसत हो गईं।
मरते दम तक किया भारतीय नागरिकता का इंतजार, अंत में न भारत की रही न पाकिस्तान की
पाकिस्तान के कराची शहर में जन्मी नादिरा का निकाह वर्ष 1983 में अनूपशहर के मोहल्ला मदारगेट निवासी एडवोकेट सरदार खां के साथ हुआ था। निकाह के बाद से ही नादिरा लांग टर्म वीजा लेकर लगातार भारत में रह रही थीं। इस दौरान उन्होंने नियमानुसार भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया। बीते दिनों नादिरा बेगम ने पाकिस्तान की नागरिकता भी सरेंडर कर दी।
कुछ समय पहले पाकिस्तान ने भी नागरिकता को लेकर अपनी एनओसी जारी कर दी थी, लेकिन 34 साल से भारत में रह रही नादिरा बेगम को भारतीय नागरिकता हासिल नहीं हो सकी। परिजनों ने बताया कि जीते जी नादिरा को अफसोस रहता था कि वह कब शान से खुद को भारत का नागरिक कह सकेंगी, लेकिन उनका यह सपना एक सपना बनकर रह गया।
मंगलवार सुबह परिजनों द्वारा नादिरा बेगम को अस्वस्थ होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नादिरा बेगम के दो संतान हैं। एक बेटा व एक बेटी, दोनों संतानों की शादी हो चुकी है।
बेटा शेख रेहान ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि काश सिस्टम और तेजी से काम करता तो उनकी मां को मरने से पूर्व खुद को फख्र से भारतीय कहने का गर्व होता। वहीं, बार एसोसिएशन अनूपशहर के अधिवक्ता भी सरदार खां एडवोकेट की धर्मपत्नी नाहिदा बेगम के आकस्मिक निधन पर शोकस्वरूप अदालती कामकाज से विरत रहे।
करीब 20 वर्ष से नादिरा बेगम की फाइल शासन में विचाराधीन थी। वह अनूपशहर में एलटीवी यानी कि लांग टर्म वीजा लेकर रह रहीं थीं। लांग टर्म वीजा हर साल रिन्युअल होता था। परिजन शासन से नादिरा को भारतीय नागरिकता देने की मांग रहे थे। एलआईयू के एक अधिकारी ने बताया कि नादिरा की सभी कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी थी। गृह मंत्रालय से उनका प्रमाणपत्र आना रह गया था।