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Twin Tower: 32 मंजिला इमारत को गिराने को जहां हुआ ब्लास्ट, वहां अब क्या स्थिति, तस्वीरों में देखें

Mon, 29 Aug 2022 08:45 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 29 Aug 2022 08:45 AM IST
सार

नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर को विस्फोटक द्वारा गिराए जाने के बाद आज हालात सामन्य हैं। मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं, एमरॉल्ड सोसाइटी में परिवारों का लौटना जारी है। 

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Twin Towers rubble laying bare post the explosion of Supertech Twin Towers in Noida
Twin Towers - फोटो : एएनआई
नोएडा के सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट ट्विन टावर की नौ साल की लड़ाई का अंत 12 सेकेंड में हो गया। सेक्टर-93ए स्थित ट्विन टावर के 32 मंजिला एपेक्स और 29 मंजिला सियान रविवार को जमींदोज हो गए। इस काम को एडिफिस इंजीनियरिंग और जेट डिमोलिशन की तकनीकी टीम ने अंजाम तक पहुंचाया। जीत का सेहरा एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए के सिर बंधा है। हालांकि, चुनौती अभी भी 90 दिन की बाकी है। इस बीच प्राधिकरण को करीब 30 हजार टन मलबे को इको फ्रेंडली तरीके से निस्तारित करना है।  
Twin Towers rubble laying bare post the explosion of Supertech Twin Towers in Noida
Twin Tower - फोटो : एएनआई
नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर को विस्फोटक द्वारा गिराए जाने के बाद आज हालात सामन्य हैं। मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। पहले, सड़कों को साफ किया जा रहा है। विभिन्न हाउसिंग सोसाइटियों के बाहर सफाई अभियान चल रहा है। वहीं, एमरॉल्ड सोसाइटी में परिवारों का लौटना जारी है। विध्वंस के एक दिन बाद मलबे के पहाड़ दिखाई दे रहा है।
 
Twin Towers rubble laying bare post the explosion of Supertech Twin Towers in Noida
कुछ पलों में ही जमींदोज हो गए ट्विन टावर। - फोटो : PTI
तकनीक वाटर फॉल इम्प्लोजन, विस्फोटक 3,700 किग्रा के
आपको बता दें कि रविवार को दोनों टावर वाटर फॉल इम्प्लोजन तकनीक से गिराए गए। इससे पहले एक टावर को थोड़ा सा टेढ़ा भी किया गया, जिससे उसका मलबा नजदीकी टावरों तक न पहुंचे। रविवार विस्फोट होने के चार सेकेंड के भीतर पानी के झरने सरीखा दृश्य उभर आया। तभी इसे वाटर फॉल इम्प्लोजन तकनीक कहा गया। इसमें पहले बेसमेंट को ध्वस्त किया गया। इसके बाद ऊपर से नीचे एक-एक कर तल ढहते चले गए। पूरी इमारत सीधे बैठ गई। ध्वस्तीकरण ऐसा रहा कि बगल की नौ मीटर दूर के टावर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
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Twin Towers rubble laying bare post the explosion of Supertech Twin Towers in Noida
Twin Tower Demolition - फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ विस्फोटक के तौर पर सुपर पावर 90 क्लास-2 के325 किलोग्राम का प्रयोग हुआ। इसके अलावा सोलर कॉर्ड का प्रयोग हुआ, जो 8,400 मीटर, 5,000 मीटर, 3,900 मीटर और 46,000 मीटर रहे। वहीं, नॉन इलेक्ट्रिक डेटोनेटर का प्रयोग हुआ, जो कि क्लास 6 डिविजन-2 का रहा। यह 10990 की संख्या में रहे। पूरी प्रक्रिया में कुल 3,700 किग्रा विस्फोटकों का इस्तेमाल हुआ। दोनों टावरों में लगे विस्फोटकों को तारों से जोड़ा गया। इन तारों को ब्लैक बॉक्स से जोड़ा गया, जो कि 100 मीटर दूर रहा। इसके बाद कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया। इस तकनीक की मदद से पहले सियान और उसके बाद एपेक्स टावर गिरा। 
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Twin Towers rubble laying bare post the explosion of Supertech Twin Towers in Noida
ट्विन टावर्स ध्वस्त - फोटो : ANI
कंट्रोल्ड ब्लास्ट तकनीक की ली गई मदद
फरवरी में साइट पर कब्जा लेने के बाद से सबसे बड़ा सवाल गिराने के तरीके पर बना हुआ था। इसके लिए जेट डिमोलिशन ने दो तरीके बताए। पहला, मैनुअल तरीके से 10 माह में औरे दूसरा, कंट्रोल्ड ब्लास्ट करके। दूसरे तरीके पर सहमति बनी। धमाका पूरी तरह से नियंत्रित रखना था। इससे बसावट के बीच खड़े टावर को गिराने की दिशा की अड़चन नहीं थी। मलबा सीधे नीचे गिरना था। इससे आस-पास की इमारतों के नुकसान होने की भी आशंका नहीं थी।
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