नोएडा में 14 साल पहले देश-दुनिया को हिलाकर रख देने वाले निठारी कांड में जांच एजेंसी सीबीआई ने कुल 19 मामले दर्ज किए थे। इनमें से 12 मामलों में निठारी के नरपिशाच को कोर्ट फांसी की सजा चुना चुकी है। हालांकि सीबीआई विशेष कोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। निठारी कांड से संबंधित तीन मामले ऐसे भी हैं, जिनमें कोई सबूत न मिलने से यह मामले अब राज ही रह गए हैं। सीबीआई इन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट विशेष कोर्ट में दाखिल कर चुकी है।
29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड का जब खुलासा हुआ था तो पूरा देश हिल गया था। कोठी संख्या डी-5 से पुलिस ने जब सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया तो एक के बाद एक हत्याकांड के राज खुलते चले गए। दिल दहला देने वाला यह मामला इस कदर हाईप्रोफाइल चर्चा में आया कि 13वें दिन ही 11 जनवरी 2007 को इसकी जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई।
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पंधेर की कोठी
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पंधेर को सीबीआई ने पहले ही दी थी क्लीन चिट
शुक्रवार को 12वें मामले में सीबीआई विशेष कोर्ट ने इस मामले के दूसरे आरोपी और कोठी संख्या-डी-5 के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को बरी किया है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि मोनिंदर सिंह पंधेर को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में ही क्लीनचिट दे दी थी।
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nithari case
- फोटो : अमर उजाला
इस मामले की जो चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई थी, उसमें मोनिंदर सिंह पंधेर का नाम नहीं था। इसमें सिर्फ सुरेंद्र कोली को ही आरोपी बनाया गया था। सीबीआई की तत्कालीन विशेष न्यायाधीश ने सीआरपीसी की धारा-319 के तहत पंधेर को भी इसमें तलब कर लिया था। अब कोर्ट ने सबूतों के अभाव में मोनिंदर सिंह पंधेर को बरी कर दिया है।
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nithari case
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319 दिन चली कार्रवाई, 38 गवाहों ने दर्ज कराए बयान
शुक्रवार को डासना जेल में बंद निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को जिस 12वें मामले में विशेष कोर्ट ने दोषी ठहराया है, उसकी सुनवाई 319 दिनों तक चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 38 गवाह कोर्ट में पेश किए गए।