पंचायत चुनाव: शहीद इंस्पेक्टर की पत्नी ने क्यों कहा- ‘ये कुल्हाड़ी हमारे लिए नहीं, वर्ष 2022 इसका उत्तर देगा’
बता दें कि रजनी सिंह और उनका बेटा कोरोना से पीड़ित है और होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं। दरअसल, वर्ष 2018 में गोकशी को लेकर बुलंदशहर के स्याना में जमकर बवाल और हिंसा हुई थी। सूचना पर इंस्पेक्टर सुबोध स्थिति को नियंत्रण करने पहुंचे थे। इसी दौरान उनको गोली मार दी गई थी। हिंसा मामले में योगेश का नाम भी आया था। योगेश एक हिंदू संगठन से जुड़ा था। उसे जेल भी भेजा गया था, लेकिन बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया।
लिखा.. आज दो मिनट का मौन धारण कर रही हूं
सरकार आज एक शहीद की आत्मा बहुत रोई होगी। हां, क्यूं नहीं रोये.. जिसने स्याना क्षेत्र के कई इंसानों की जान बचाने के लिए अपने सर को नष्ट करवा दिया हो। उस क्षेत्र की जनता ने दिखा दिया कि वो लोग इस लायक नहीं हैं। आज दो मिनट का मौन धारण कर रहीं हूं उस शासन के लिए जो मेरी निगाहों में मर चुका है। मैं मौन धारण कर रहीं हूं, उस प्रशासन के लिए जिसमें कुछ लोग इतने भूखे हैं कि पेट के लिए कुछ भी कर सकते हैं। मैं और मेरा परिवार 50 लाख रुपये में बिकने वाले इंसान नहीं हैं। सरकार अपना दिया हुआ पैसा वापस ले ले। बदले में हत्यारे का सर अपने हाथों से हमें सौंप दे। दिल भी रोया आत्मा भी रोई। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह आप अमर थे और रहेंगे।
रजनी सिंह ने कहा कि मुझे योगेश के चुनाव लड़ने की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर चुनाव जीतने की पोस्ट देखने के बाद ही उन्हें इसका पता चला है, लेकिन वह इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखेंगी। वह जानना चाहती हैं कि संगीन केस के आरोपी को चुनाव लड़ने की अनुमति किस आधार पर और क्यों दी गई?