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निर्भया केस: बनना चाहती थीं आईएएस, लेकिन बनीं वकील, सीमा के पहले केस को हमेशा याद रखेगी दुनिया
Sat, 21 Mar 2020 10:58 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 21 Mar 2020 10:58 AM IST
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
निर्भया के दोषियों को फांसी तक पहुंचाने वाली वकील सीमा कुशवाहा का यह पहला केस था और उन्होंने सात साल तक चले इस केस के लिए कोई पैसा नहीं लिया। इतना ही नहीं वह निर्भया के माता-पिता की ओर से दोषियों के पक्ष पर हमेशा हमलावर रहीं और आखिरकार उन्होंने इस लड़ाई में जीत हासिल कर ली।
निर्भया के पिता
- फोटो : अमर उजाला
सीमा कुशवाहा ने बताया कि निर्भया के साथ हुई दरिंदगी के बाद ही उन्होंने पीड़ित परिवार की लड़ाई निशुल्क लड़ने का प्रण लिया था। सात सालों की लड़ाई में उन्होंने साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, हर पड़ाव में निर्भया का पक्ष पेश किया।
Seema kushwaha
- फोटो : Social Media
उन्होंने बताया कि यह केस उनके जीवन ऐसा केस है जिसे देश और दुनिया हमेशा याद रखेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें बेहद खुशी है कि इस लड़ाई में उन्हें जीत मिली और निर्भया के परिवार को न्याय मिला। उन्होंने बताया कि केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग नहीं करती तो इस केस के समाप्त होने में और भी ज्यादा समय लगता।
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Seema kushwaha
- फोटो : Social Media
बताया कि जिस जगह से वह संबंध रखती हैं, वहां भी लड़कियों को शहरों की तरह आजादी नहीं दी जाती, इसलिए उन्होंने अपनी इस लड़ाई को जीतकर अपने घर, रिश्तेदारों व समाज को भी यह संदेश दिया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं।
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Seema kushwaha
- फोटो : Social Media
आईएएस बनना चाहती थीं, लेकिन वकील बनीं
वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की है। उनका कहना है कि वह आईएएस बनना चाहती थीं, लेकिन वकील बनीं। निर्भया का केस लड़ने पर उन्हें खुद पर गर्व है कि उन्होंने वकील बनने का फैसला किया। जिस वक्त निर्भया के साथ यह घटना हुई तब वह वकालत की प्रैक्टिस कर रही थीं और तभी उन्होंने सोचा था कि वह इस केस को हर हाल में जीतकर ही रहेंगी।
वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की है। उनका कहना है कि वह आईएएस बनना चाहती थीं, लेकिन वकील बनीं। निर्भया का केस लड़ने पर उन्हें खुद पर गर्व है कि उन्होंने वकील बनने का फैसला किया। जिस वक्त निर्भया के साथ यह घटना हुई तब वह वकालत की प्रैक्टिस कर रही थीं और तभी उन्होंने सोचा था कि वह इस केस को हर हाल में जीतकर ही रहेंगी।